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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोप से किया बरी , फिरूराम साहू को तीन साल बाद मिला न्याय ..
न्यायधानी के युवा वकील की भूमिका रही अहम.!



डेस्क खबर नई दिल्ली / सक्ती,/  “न्याय की डगर चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, सत्य की जीत अंततः होती है।” यह साबित कर दिखाया ग्राम चिस्दा (थाना हसौद, जिला सक्ती, छत्तीसगढ़) के निवासी फिरूराम साहू ने, जिन्हें मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला और हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।
फिरूराम साहू पर आरोप था कि उन्होंने अपने छोटे भाई की पत्नी की हत्या की थी। जुलाई 2023 में सक्ती फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर में अपील की, परंतु जनवरी 2024 में वह अपील भी खारिज हो गई।
परिवार ने हार नहीं मानी। अंततः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस पूरे संघर्ष में एक अहम भूमिका निभाई बिलासपुर के युवा वकील शिवांक मिश्रा ने, जो महज 24 वर्ष की उम्र में कानून की बारीकियों में गहरी पकड़ रखते हैं। उन्होंने न सिर्फ केस की हर परत को बारीकी से समझा, बल्कि साहू परिवार की बातों को भी गंभीरता से सुना।
शिवांक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में यह सिद्ध किया कि फिरूराम साहू को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं थे। उनकी तर्कशक्ति और प्रस्तुति से न्यायालय सहमत हुआ और 29 अप्रैल 2025 को साहू को निर्दोष घोषित कर रिहा कर दिया गया।
करीब तीन वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला केवल एक परिवार की जीत नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली में विश्वास का प्रतीक है। यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो सच्चाई के साथ अडिग खड़े रहते हैं।

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