डेस्क खबरबिलासपुर

खबर का बड़ा असर: 28 लाख में बनी सरकारी स्कूल की बिल्डिंग 11 महीने में ही तड़की ! बीजेपी विधायक और कांग्रेसी अध्यक्ष से भ्रष्ट अधिकारियों ने करवाया था लोकार्पण ! बच्चों की सुरक्षा में उठे थे सवाल .??  खबर के बाद शुरू हुई लीपापोती!


डेस्क खबर बिलासपुर ../ एक बार फिर जनहित के मुद्दे पर प्रसारित डंकाराम पोर्टल की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है ।जिले के तखतपुर नगर पालिका परिषद तखतपुर के वार्ड क्रमांक 12 में बनी 28 लाख में बनी भ्रष्टाचार की सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का मुद्दा कि खबर को पोर्टल ने प्रमुखता से उजागर किया था। गौरतलब है कि तखतपुर नगर पालिक के भ्रष्ट अधिकारियों ने कमीशन के चक्कर में बिना गुणवत्ता की जांच किए इस भ्रष्टाचार की इमारत का लोकार्पण भी बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह और कांग्रेस नगर पालिक अध्यक्ष पूजा मक्कड़ के हाथों करवा कर इतश्री कर ली थी।


तखतपुर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत करीब 28 लाख रुपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त चार कक्षों वाला विद्यालय भवन निर्माण के महज कुछ महीनों बाद ही बड़ी बड़ी दरारों से दिवाले तड़क गई थी  भवन की दीवारों और संरचना में आई बड़ी-बड़ी दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हैरानी की बात यह है कि जिस नए भवन पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वह एक साल भी नहीं टिक पाया, जबकि परिसर में स्थित पुराना स्कूल भवन करीब कई दशकों से व से संचालित हो रहा है। इससे नए निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लोगों में आक्रोश है।


मामला उस समय और गंभीर हो गया जब निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और घटिया सामग्री के उपयोग की खबर सामने आई। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया और छूटी के ही दिन रविवार को ही भवन में पड़ी दरारों को भरने तथा मरम्मत का काम शुरू कर मामले में लीपापोती का काम ठेकेदार द्वारा आनन फानन में शुरू भी कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तकनीकी जांच कराने के बजाय केवल लीपापोती कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान भी इस भ्रष्ट और जर्जर बिल्डिंग बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के संज्ञान में  भी लाया गया था। शिकायतकर्ताओं ने भवन की जर्जर स्थिति को बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कलेक्टर से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। कलेक्टर ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए CMO को जांच के सख्त निर्देश जारी किये थे लेकिन उसके बाद भी अधिकारी कलेक्टर के आदेश को गंभीरता से न लेते हुए सोये हुए थे लेकिन खबर प्रसारित होते ही भ्रष्टाचार में कमीशन के आरोपों में लिप्त निकाय अधिकारीयो ने रविवार के दिन ही इमारत में हुए गुणवत्ताविहीन कार्यों को छुपाने के लिए मरम्मत का काम शुरू कर मामले में लीपापोती शुरू कर दी है।



बताया जा रहा है कि क्षेत्र में  KGN कंस्ट्रक्शन के नाम से कई निर्माण कार्य पूर्व में भी किए गए हैं,और वर्तमान में भी किए जा रहे है  जिनमें पचरैहा नाला, नाली निर्माण, सड़क निर्माण और गौरव पथ जैसे कार्य शामिल हैं। इन कार्यों में भी गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। गौरव पथ निर्माण में ग्रिल गायब होने और मानक से हल्का निर्माण किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। लेकिन उसके बाद सिर्फ कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार जनता का पैसा बर्बाद करते नजर आ रहे है। हालांकि स्कूल बनाने वाले ठेकेदार ने सरकारी स्कूल में आई दरारों के लिए निर्माण कार्य के दौरान पानी की कमी और जमीन के बैठने के कारण आई दरारों को जिम्मेदार बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया।



अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक भवन की दरारों का मामला नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उनका सवाल है कि यदि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो गया तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किसने की और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या जांच की।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में कई निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में स्कूल भवन का मामला सरकारी निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की आशंकाओं को और मजबूत करता है।
स्थानीय निवासियों  ने मांग की है कि भवन की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा दोषी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि बच्चों की जान जोखिम में डालने वालों को केवल मरम्मत कर बचने नहीं दिया जाना चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल दरारों पर प्लास्टर कर मामले को खत्म मान लेगा, या फिर 28 लाख रुपये के इस निर्माण कार्य की गहराई से जांच कर दोषियों को कटघरे तक पहुंचाएगा? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्कूल संचालन के दौरान कोई हादसा हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता ?? अब देखना होगा कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली खबर के बाद कब मामले में दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाती है ।

भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा सरकारी स्कूल  ,बच्चों की जान से खिलवाड़, नए स्कूल भवन में पड़ी दरारें, उखड़ने लगी टाइल्स , विद्यालय में नहीं है शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं कौन है आखिर जिम्मेदार ??

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