पूर्व सीएम बघेल का झलका दर्द .!!!
बीजेपी का प्रतिरोध राजनीति से प्रेरित..!!
मोदी की गारंटी विष्णुदेव साय के सुशासन में सट्टा चल रहा है साय साय..!!
fir के उन बाद बघेल की प्रतिक्रिया आई सामने ।



डंकाराम/छत्तीसगढ़/ रायपुर
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने महादेव ऐप केस में अपने खिलाफ एफआईआर पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है… उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध के चलते एफआईआर कराया गया है….
बघेल राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र का दौरा अधूरा छोडक़र रायपुर पहुंचे और यहां राजीव भवन में मीडिया से रूबरू हुए….बघेल के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने महादेव ऑनलाईन सट्टा ऐप केस में एफआईआर दर्ज किया है… इस पर पूर्व सीएम ने कहा कि ईओडब्ल्यू में 4 मार्च को प्रकरण दर्ज हुआ था और 17 मार्च को दिल्ली के एक अखबार में इसकी खबर प्रकाशित हुई….. बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने ही महादेव ऐप मामले में सबसे ज्यादा कार्रवाई की थी… 72 एफआईआर हुए और 450 लोगों को गिरफ्तार किया गया था…उन्होंने यह भी बताया कि गूगल ने हमारे ही निवेदन पर महादेव ऐप को बंद किया था… मगर आज भी अन्य नामों से ऑनलाईन सट्टा जारी है…बघेल ने जानकारी देते हुए बताया कि जुआ एक्ट का कानून लचीला होने के चलते तत्कालीन सरकार में विधानसभा में नया बिल लाया गया था… जिसे सरकार ने पारित किया… उस बिल में कड़े प्रावधान है….
पूरे देश में महादेव एप पर छत्तीसगढ़ में ही कार्यवाही हुई… पूर्व सीएम ने कहा कि ईडी की एफआईआर में भी कहीं भी उनका नाम नहीं था…. यही नहीं, दुबई में शुभम सोनी के बयान से काउंसलेट ने अलग किया है… शुभम सोनी का वीडियो भाजपा कार्यालय से जारी हुआ था…उन्होंने कहा कि राजनांदगांव से चुनाव लडऩे की चर्चा पहले से ही थी… अब ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ एफआईआर किया है यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक कार्रवाई है….दबाव में की गई प्रतिशोध की कार्रवाई है… पूर्व सीएम ने कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी….
उन्होंने कहा कि राजनांदगांव में भाजपा हार मान चुकी है इसलिए बदनाम करने के लिए इस तरीके की चीज लाई है… उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी और विष्णु देव साय के सुशासन में महादेव ऐप सांय-सांय चल रहा है…
भूपेश ने कहा ईडी कि कार्यवाही के बाद से सत्ता पक्ष के एकाउन्ट में पैसा डाला जा रहा है..जिसका खुलासा भी हुआ है की सट्टा चलाने वाले फ्यूचर गेमिंग के द्वारा सबसे ज्यादा पैसा बांड के जरिए दिया गया है..मेरे चुनाव लडने से बीजेपी को हार का भय सता रहा है इसलिए उन्हें बदनाम करने के लिए नाम fir में डाला गया है ..बहुत ही सामान्य सी बात है यदि थाने में ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज हो तो उसी दिन उसको अपनी पोर्टल पर वेबसाइट पर डालना होता है,,जबकि उस दिन तक उनका नाम एफआईआर में नहीं था ।