शनि अमावस्या स्पेशल..!
देश का पहला और प्राचीन मंदिर ..!
पत्नी के साथ विराजमान है शनि देव.!

कवर्धा।न्याय के देवता शनिदेव के कई प्रसिद्ध मंदिर देश के कोने कोने में मौजूद है जहां पर साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कवर्धा में शनि देव का यह एक ऐसा भी मंदिर है जहां वे अपनी पत्नी स्वामिनी के साथ विराजमान है जिसे पति पत्नी दोनों एक साथ पूजा कर सकते हैं यह देश का प्रथम और प्राचीन मंदिर है टेढ़े मेढ़े कटीले रास्ते और घने जंगलों को पार कर इस मंदिर में जाना पड़ता है जहां पर भगवान शनि देव अपनी पत्नी के साथ विराजमान है कवर्धा, जिला मुख्यालय से भोरमदेव मार्ग पर 15 किलोमीटर की दूरी में ग्राम छपरी नाम का एक गांव है जहां से 500 मीटर आगे एक प्राचीन मड़वा महल मिलता है।

वहीं से घने जंगलों के बीचोबीच टेढ़े मेढ़े पथरीला रास्ता और सकरी नदी के उतार-चढ़ाव हिस्से को पार कर जाना पड़ता है ग्राम करिया आमा, जहां देश का एकमात्र शनि देव का मंदिर है जहां पत्नी के साथ विराजमान है शनिदेव का यह प्रतिमा पांडव कालीन बताई जाती है जब पांडव पर ग्रह दशा लगा था तो इसी मंदिर में सनी देव भगवान की पूजा अर्चना कर ग्रह शांत कर आए थे , पूर्वजों से यहां पर भगवान शनि देव विराजमान है घोर जंगलों के बीच होने के कारण कुछ वर्ष पूर्व ही लोगों की इस पर नजर पड़ी तब वहां पर साफ सफाई कर देखा तो भगवान शनिदेव अपनी पत्नी के साथ विराजित थे तभी से भक्तों का आना जाना लगा रहता है लेकिन कितनी दुर्भाग्य की बात है।

कई वर्षों में अभी तक रोड का निर्माण नहीं हो सका है मंदिर तक जाने के लिए नदी नाले जंगल झाड़ियों को पार करके पैदल जाना पड़ता है, इस मंदिर में पति पत्नी दोनों एक साथ पूजा कर सकते हैं लोगों की मनोकामना भी पूरी होती है देश का प्रसिद्ध मंदिरों यह पहला मंदिर होगा जहां भगवान शनिदेव अपनी पत्नी के साथ विराजमान है

और यह प्राचीन काल से धरती से निकला हुआ प्रतिमा है जिसके दर्शन के लिए हर शनिवार को लोगों का तांता लगा रहता है घने जंगलों के बीच होने के कारण बहुत कम लोग जा पाते हैं वही पुजारी जी का कहना है अगर वहां पर रोड की सुविधा हो जाए सड़कों की सुविधा हो जाए तो लोगों को आसानी से भगवान शनिदेव की दर्शन आसानी से हो सकती है