
डेस्क खबर बिलासपुर ./ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के गोलबाजार क्षेत्र में बिना वैध अनुमति के काम्प्लेक्स का अवैध निर्माण पूर्ण होता नजर आ रहा है। फुल छाप कांग्रेसी नेता के कथित रूप से चल रहे काम्प्लेक्स निर्माण के लिए ना तो अनुमति ली गई है और ना ही गोलबाजार जैसे व्यस्तम इलाके में इस इमारत में कोई पार्किंग की व्यवस्था के लिए कोई जगह छोड़ी गई है। इतना ही नहीं नाले में भी बेखौफ होकर अतिक्रमण कर लिया गया है। ऐसा भी नहीं है कि इस अवैध निर्माण की जानकारी निगम के जिम्मेदार अफसरों को नहीं है सब कुछ जानकारी में होने के बाद भी गरीबों पर कहर बनकर बरसने वाले निगम अफसर फूल छाप कांग्रेसी नेता के आगे नतमस्तक नजर आ रहे है । मीडिया के सामने इस भवन निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के अधिकारियों के दावे हकीकत में खोखले नजर आ रहे है। इस अवैध इमारत निर्माण पर सभापति सहित क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने भी गंभीर आपत्ति जताते हुए जनदर्शन से लेकर निगम प्रशासन सहित कलेक्टर से शिकायत करते हुए अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और जांच की मांग भी की लेकिन उसके बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर निगम के अधिकारी इस कॉम्लेक्स के निर्माण को रोकने में दिलचस्पी लेते नजर नहीं आ रहे थे जिसके फलस्वरूप यह निर्माण लगभग पूरा होकर खुलने की कगार पर है ।


निगम के अधिकारियों और शिकायतकर्ता से मिली जानकारी के अनुसार आगजनी की हुई घटना के बाद फुल छापं कांग्रेसी नेता सीएमडी कालेज के चेयरमैन संजय दुबे ने इस इमारत को मरम्मत के परमिशन लेने के नाम पर बिना अनुमति के अवैध कॉम्लेक्स तान दिया। जबकि इसके बगल में सकरी गली के अंदर कई लोगों के व्यासायिक प्रतिष्ठान और घर मौजूद है ऐसे में यदि कोई अनहोनी होती है तो तंग गलियों के चलते सरकारी मदद पहुंच पाना कठिन होगा , जिसके चलते रहवासियों के मन में हमेशा किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।


लगभग पूर्ण हो चुके इस अवैध कॉम्लेक्स के बाद निगम प्रशासन द्वारा मीडिया में दिए गए बयान के बाद सवाल खड़े हो रहे है कि रोक थी या सिर्फ बयान?” क्योंकि जनदर्शन में शिकायतें, सदन में तीखी बहस और सभापति की सख्त टिप्पणियों के बावजूद कार्रवाई निगम के जिम्मेदार अफसरों ने नहीं की, शिकायकर्ताओं का भी गंभीर आरोप हैं कि प्रशासनिक स्तर पर केवल औपचारिक जवाब और फाइलों में प्रक्रिया चलती रही, जबकि निर्माण लगातार मजबूत होता गया। टालने की नीति या व्यवस्था की कमजोरी के कारणअधिकारियों की भूमिका पर यह सवाल लगातार गहराता जा रहा है कि क्या यह मामला केवल लापरवाही है या फिर जानबूझकर कार्रवाई को टाला गया। कई बार हाईकोर्ट के निर्देशों और विधिक राय का हवाला देकर मामले को आगे बढ़ाया जाता रहा, जबकि निर्माण बिना रुकावट जारी रहा। अब ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि यदि कोई हादसा हो जाता है और रेस्क्यू में इस इमारत के कारण दिक्कत आती है और कोई अनहोनी हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदे बैठे निगम के अफसर या फूल छाप कांग्रेसी नेता .??

लेकिन अब गोलबाजार क्षेत्र में बिना वैध अनुमति कथित रूप से चल रहे काम्प्लेक्स निर्माण का मामला सीधे हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम प्रशासन से सख्त लहजे में जवाब तलब किया है कि आखिर यह निर्माण किस अनुमति के आधार पर और किन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहा है।
हाईकोर्ट का सीधा सवाल—“अनुमति है या नहीं, स्पष्ट करें” न्यायालय ने निगम प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि निर्माण को लेकर कोई अनुमति जारी हुई है तो उसका पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड पेश किया जाए। साथ ही मामले को 7 मई को नए प्रकरण के रूप में सूचीबद्ध करने के आदेश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि बीजेपी में शामिल हुए सीएमडी कालेज के चेयरमैन संजय दुबे पहले कांग्रेस पार्टी में थे और उस दौरान भी कालेज के बगल में तैयार बिल्डिंग में गफलत के आरोप लगने कई मीडिया में सुर्खिया बनी थी ,और नियमों के विपरीत कालेज के बगल में अवैध निर्माण के आरोप भी लगे थे। और अब इस बार कांग्रेस से बीजेपी पार्टी का दामन थामने के बाद गोलबाजार इलाके में निर्माणाधीन इमारत में भी इनके खिलाफ शिकायत की गई है ।