डेस्क खबरबिलासपुर

VIDEO –बीजेपी राज में गौमाता के सम्मान के दावों की खुली पोल! उपमुख्यमंत्री के गृहजिले में गृहमंत्री के निर्देश का अपमान ! कचरे के ढेर पर सड़ते मिले एक दर्जन से अधिक मृत गोवंश, जिम्मेदार खामोश ! तस्वीरें आपको विचलित कर सकती है !!



डेस्क खबर बिलासपुर / मुंगेली ..। एक तरह जहां प्रदेश में बीजेपी की सरकार में जहां एक ओर गौ संरक्षण और सनातन संस्कृति को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र से सामने आई तस्वीर ने पूरे सिस्टम के दावों की पोल खोल कर रख दी है। प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण सांव के गृहजिले में प्रदेश के  उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा जारी किए गए निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है जिसके कारण सरकार के गौसेवा के दावों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुंगेली शहर से लगे रेहुटा गांव स्थित कचरा डंपिंग यार्ड में एक दर्जन से अधिक मृत गोवंश खुले कचरे के बड़ी बेदर्दी से खुले ढेर पर मरे पड़े मिले, जिससे इलाके में भारी बदबू और गंदगी  फैल गई है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद से गौमाता के सम्मान पर सवाल के साथ साथ मुंगेली में प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है ।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जहां भी मृत गौमाता मिले, उनका सम्मानपूर्वक दफन किया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत में नगर पालिका की कार्यप्रणाली ने इन निर्देशों को दरकिनार कर दिया। मृत गोवंशों को कचरे के बीच फेंके जाने की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण मानी जा रही है।




स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के ढेर में सड़ते शवों से उठ रही तेज बदबू के कारण वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि खुले में पड़े मृत पशुओं से संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हिन्दू सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में इस तरह का व्यवहार लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि जब गाय को माता कहा जाता है, तो उसकी मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता?


इधर हाल ही में संत रामभद्राचार्य ने गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग उठाई थी। एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर गौ संरक्षण की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है । गौरतलब है कि पिछले सप्ताह गौ सेवकों ने विभिन्न मांगों को लेकर मुंगेली कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने 16 आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि आंदोलनकारियों पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन मृत गोवंशों के अपमान पर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?
इस पूरे मामले में नगर पालिका के सीएमओ से मीडियाकर्मियों ने  संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। अब देखना होगा कि मंचों से गौमाता का सम्मान सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित है, या फिर प्रशासन जमीन पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा? और सबसे बड़ा सवाल  क्या दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेगा या फिर एक बार यह गंभीर मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में सिर्फ बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप तक सीमित रह जायेगा ताकि गौमाता के नाम पर अपमान राजनैतिक रोटी सेकी जा सके और हिन्दू धर्म में मां का दर्जा पाने वाली गौमाता का इसी तरह मरने के बाद भी बीजेपी राज में सड़कों में अपमान होता रहे .???

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