डेस्क खबरबिलासपुर

फाइलों में सब OK जमीन पर जनता ‘अंधेरे’ में …मौसम बहाना या सिस्टम की बड़ी गड़बड़ी?”
हर साल फेल होती बिजली व्यवस्था—आखिर जिम्मेदार कौन? मेंटेनेंस के नाम पर चल रहा बिजली विभाग में बड़ा खेल .??



डेस्क खबर बिलासपुर / देश में सरप्लस बिजली राज्य का तमगा प्राप्त  प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले में  बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां विभागीय रिकॉर्ड में मेंटेनेंस और सुधार के दावे किए जाते हैं, वहीं जमीनी स्तर पर बिजली कटौती, ट्रिपिंग और अनियमित आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। ट्रिपल इंजन की सरकार के राज में बारिश से पूर्व लगातार मेंटेनेंस के नाम पर लाखों करोड़ों का भुगतान कर घंटों तक लाइट बंद करने के वावजूद हल्की हवा तूफान और बारिश आते ही कागजों में सब कुछ ठीक होने वाली बिजली व्यवस्था दम तोड़ती नजर आती है और जनता को घण्टों अंधेरे में गुजरना पड़ता है। दो दिन पहले मौसम में अचानक बदलाव में चली तेज हवाओं और बारिश के चलते अब भी कई इलाकों में बिजली के आंख मिचौली के कारण जनता के बीच हाहाकार मचा हुआ है। वही बिजली की समस्या से परेशान जनता को हर बार की तरह लापरवाह अधिकारी मौसम का बहाना बताकर सिस्टम की गड़बड़ी को छुपाने के काम में लग जाते है। सिस्टम भी ऐसा कि शिकायत केंद्रों से लेकर जिम्मेदारों के फोन रिसीव होना बंद हो जाते है। सबसे बड़ा सवाल फील्ड निरीक्षण और फाइल रिकॉर्ड के बीच के अंतर को लेकर उठ रहा है। लोगों का कहना है कि कई बार कागजों में काम पूरा दिखा दिया जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति में सुधार दिखाई नहीं देता। सूत्रों का दावा है बिजली विभाग में जनता के टैक्स के पैसों से मेंटेनेंस माफिया के नाम पर एक सिंडिकेट संगठित गिरोह सिर्फ कागज़ों में विभागीय संरक्षण में काम कर रहा है और मेंटेनेंस के नाम पर लाखों करोड़ों का व्यारा किया जा रहा है। ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही और सांठगांठ का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है और अंधेरे में जिंदगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है । जिसके बाद सवाल उठना लाजमी है कि क्या हर साल होने वाली बिजली फेल्योर सिर्फ मौसम का बहाना है या सिस्टम के भीतर गहरे भ्रष्टाचार की जड़ें छिपी हैं?
स्थानीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया, ट्रांसफार्मर खरीद, केबल सप्लाई की गुणवत्ता और मेंटेनेंस भुगतान को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। ठेकेदारों की भूमिका और निरीक्षण की वास्तविकता अब जांच के दायरे में आने की मांग कर रही है।
लोगों का कहना है कि हर साल मौसम को जिम्मेदार बताकर समस्या को टाल दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं देता।
अब बड़ा सवाल जिम्मेदारी का खड़ा हो रहा है और
मांग उठ रही है कि पूरे बिजली तंत्र की उच्च स्तरीय जांच हो—ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुधार वास्तव में हुआ है या केवल फाइलों में दिखाया जा रहा है। इतना ही नहीं बिजली की विकट समस्या और महंगे बिजली बिल से परेशान जनता के बीच भी स्थानीय विधायक और नेताओं के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है जिसके कारण सरकार की छबि भी खराब हो रही है  जनता की परेशानी को देखते हुए अब यह अपेक्षा की जा रही है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर बिजली व्यवस्था को सुधारने के ठोस कदम उठाए ताकि फाइलों में उजाले का दावा करने वाली दलील जमीन हकीकत में भी खरा उतर सके और बिलासपुर जी जनता को  अंधेरे से निजात मिल सके। अब देखना होगा कि गंभीर आरोपों के बीच बिजली विभाग में मेंटेनेंस के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा होता है या फिर..??

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