डेस्क खबरबिलासपुर

क्या छात्रावास अधीक्षकों की नाराजगी से पूरे छत्तीसगढ़ में मचेगी राजनीतिक हलचल? 2 लाख बच्चे, लाखों अभिभावक और गांव-गांव तक पहुंच रखने वाला संवर्ग, क्या सरकार कम आंक रही है इनकी ताकत?*

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डेस्क खबर रायपुर../ छत्तीसगढ़ में छात्रावास अधीक्षक संवर्ग की नाराजगी को क्या सरकार केवल कुछ हजार कर्मचारियों का आंदोलन समझ रही है? अगर ऐसा है तो इस मुद्दे के सामाजिक दायरे को समझना जरूरी है।

प्रदेश के छात्रावासों में लगभग 2 लाख बच्चे निवासरत हैं। इन बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को छात्रावास अधीक्षकों के भरोसे छोड़ते हैं। आदिवासी अंचलों में तो अधीक्षक और अभिभावकों के बीच पारिवारिक जैसा विश्वास और जुड़ाव देखने को मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, भविष्य, व्यवहार और अन्य समस्याओं को लेकर अभिभावक अधीक्षकों से सलाह लेते हैं। उनकी बातों और अनुभवों को भी महत्व देते हैं।

यानी अधीक्षकों का संपर्क केवल 2 लाख विद्यार्थियों तक नहीं, बल्कि उनके परिवारों और गांवों तक फैला हुआ है। शिक्षकों और स्थानीय सामाजिक व्यवस्था से भी उनका सीधा जुड़ाव रहता है।

अब जरा राजनीतिक पहलू पर गौर कीजिए!

प्रदेश के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र के गांवों से बच्चे छात्रावासों में पढ़ने पहुंचते हैं। ऐसे में छात्रावास अधीक्षक संवर्ग का आंदोलन किसी एक जिले या क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ से जुड़ा मुद्दा बन सकता है।

यदि अधीक्षकों की नाराजगी लंबी खिंचती है और विपक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाता है, तो बच्चों के भविष्य, अभिभावकों की चिंता और छात्रावास व्यवस्था को लेकर प्रदेशव्यापी बहस शुरू हो सकती है।

सरकार के सामने कुछ बड़े सवाल हैं—

– क्या अधीक्षकों की कम संख्या देखकर उनके सामाजिक संपर्क और जिम्मेदारी को कम आंका जा रहा है?
– क्या सरकार को 2 लाख बच्चों के परिवारों के साथ अधीक्षकों के पारिवारिक जुड़ाव का अंदाजा है?
– क्या इस मुद्दे का प्रभाव प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है?
– और क्या समय रहते समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन आगामी चुनाव में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा बन सकता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर सरकार कुछ हजार अधीक्षकों की नाराजगी को केवल कर्मचारी आंदोलन समझकर नजरअंदाज क्यों करे, जबकि उनके कार्यक्षेत्र से प्रदेश के लगभग 2 लाख बच्चों और उनके परिवारों का सीधा सरोकार जुड़ा हुआ है?छात्रावास अधीक्षकों की मांगों पर समय रहते संवाद और समाधान की पहल करना अब विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

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