डेस्क खबरबिलासपुर

बिलासपुर में धान खरीदी केंद्रों में अजब गजब कारनामा , सिस्टम में धान दर्ज लेकिन मौके पर गायब ! घोटाला करने वाले दोषियों को किसका संरक्षण ?? 



डेस्क खबर बिलासपुर ./ बिलासपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों में जमकर भ्रष्टचार किया जा रहा है , मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई धान खरीदी केंद्रों में सिस्टम में धान दिखाई दे रहा है लेकिन धान मंडियों में असल में धान नजर ही नहीं आ रहा है । एरमशाही धान खरीदी में तो बाकायदा डीओ भी काट दिया गया । जबकि खरीदी केंद्र में धान मौजूद था ही नहीं जिसके बाद सरपंच ने ट्रक  को खाली बारदाने के साथ रंगे हाथों पकड़ा भी ।ताजा मामला तखतपुर ब्लॉक अंतर्गत पोड़ी धान खरीदी केंद्र में बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां 240 क्विंटल धान समिति के कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज है, लेकिन वास्तविकता में मंडी से धान पूरी तरह गायब पाया गया। 23 मार्च 2026 की वीडियो रिकॉर्डिंग में स्पष्ट दिख रहा है कि फड़ पूरी तरह खाली है, जबकि उसी तारीख को सिस्टम में धान की उपलब्धता दर्शाई जा रही है।



इस मामले में सबसे बड़ा सवाल भौतिक सत्यापन पर उठ रहा है। जब अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जा चुका है, तो फिर खाली फड़ के बावजूद सिस्टम में धान कैसे दिख रहा है? इससे अधिकारियों और समिति कर्मचारियों के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका गहराती जा रही है। यह मामला लाखों रुपये के गबन की ओर इशारा कर रहा है।



गौरतलब है कि इससे पहले सीपत क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां धान भौतिक रूप से गायब था लेकिन रिकॉर्ड में मौजूद दिखाया जा रहा था। उस मामले में समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था।



अब सवाल उठता है कि पोड़ी समिति के अध्यक्ष, प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और बारदान प्रभारी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या इनकी राजनीतिक पहुंच इन्हें बचा रही है? हाल ही में सीपत में 420 क्विंटल धान गबन मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।अब देखना होगा कि प्रशासन इस घोटाले पर क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा। वही पूरे मामले में खाद्य नियंत्रक ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में 140 धान खरीदी केंद्रों में से 138 केंद्रों से पूरी तरह का धान का उठाव हो चुका है और सिर्फ एरमशाही और गतौरा धान खरीदी केंद्र में धान का उठाव बचा हुआ है और शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति के बाद दोनों खरीदी केंद्रों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया गया है ।
अब सवाल यह उठता है कि यदि धान खरीदी केंद्रों में धान का उठाव हो चुका है तो आनलाइन सिस्टम में धान क्यों दिख रहा है ?? या फिर शॉर्टेज के नाम पर धान के नाम पर लंबा खेल खेला जा रहा है ?? जिसके जवाब देने से जवाबदेह अधिकारी बचते नजर आ रहे है और कम्प्यूटर सिस्टम की आड़ में अपना अलग सिस्टम चला कर एक बड़े घोटाले को अंजाम दे रहे है ।

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