डेस्क खबरबिलासपुर

NTPC सीपत में राखड़ का खेल या सिस्टम की चुप्पी? तबादला हुआ, सवाल अब भी बरकरार!
फर्जी बिल्टी, संदिग्ध गाड़ियां और भुगतान पर सवाल! पांच महीने से धरने पर ग्रामीण, अब CBI जांच की मांग



डेस्क खबर बिलासपुर../ NTPC सीपत में राखड़ परिवहन और सेनोस्फीयर की बिक्री को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी बिल्टी, गाड़ियों के नंबरों में कथित हेरफेर, GPS और भुगतान में गड़बड़ी के आरोपों ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है। AGM अनंत वासने का बिहार तबादला होने के बाद भी विवाद थमा नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि तबादला तो हो गया, लेकिन कथित गड़बड़ियों की जांच कब होगी?
टेंडर बंद, करोड़ों के नुकसान का सवाल!
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि NTPC सीपत में सेनोस्फीयर के संग्रहण और बिक्री की टेंडर प्रक्रिया बंद होने से कंपनी को संभावित राजस्व नुकसान हुआ है। सवाल है कि टेंडर किसके आदेश पर बंद हुआ और इससे NTPC को कितनी आर्थिक क्षति हुई? इसकी जांच के लिए टेंडर दस्तावेजों और बिक्री के रिकॉर्ड का ऑडिट कराने की मांग की गई है।


एक गाड़ी, कई नंबर! 1000 किलोमीटर तक का हिसाब?
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में कम दूरी पर राखड़ पहुंचाने के बावजूद रिकॉर्ड में 500 से 1000 किलोमीटर तक का परिवहन दिखाया गया। एक ही वाहन के नाम पर कई अलग-अलग नंबरों से ट्रिप दर्ज होने की आशंका भी जताई गई है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो सवाल सिर्फ बिल्टी का नहीं, बल्कि परिवहन के नाम पर हुए भुगतान का भी है। ग्रामीणों ने वाहन नंबर, GPS लोकेशन, वे-ब्रिज पर्ची, टोल रिकॉर्ड, FASTag और गेट पास का मिलान कर जांच कराने की मांग की है।


पांच महीने से आंदोलन, फिर भी जवाब का इंतजार!
ग्राम सुखरीपाली के ठाकुरदेवा के पास ग्रामीण करीब पांच महीने से आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक उन्हें ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। परिवहनकर्ताओं से कथित 50 प्रतिशत हिस्सेदारी और भुगतान में गड़बड़ी के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
CBI जांच की मांग, निगरानी व्यवस्था पर सवाल
ग्रामीणों ने NTPC प्रबंधन, सतर्कता विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब निगरानी के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो कथित गड़बड़ियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब सवाल सीधा है—क्या सिर्फ तबादले से मामला खत्म मान लिया जाएगा, या राखड़ परिवहन से लेकर सेनोस्फीयर टेंडर तक के पूरे रिकॉर्ड की जांच होगी?
ग्रामीणों ने CBI से जांच की मांग की है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और परिवहनकर्ताओं पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि मामला सिर्फ राखड़ का नहीं, NTPC के संभावित राजस्व नुकसान और जवाबदेही का भी है।

वही इस गंभीर मामले में प्रवीण भारती सीनियर जनसम्पर्क अधिकारी एनटीपीसी सीपत का पक्ष जानने के लिए कुछ दिनों पहले कई बार मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने काल करना मुनासिब नहीं समझा। जबकि पहले उनके द्वारा खबर लगने के बाद उनका पक्ष सामने आता रहता है।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जब राखंड के खेल को लेकर तमाम आरोप एनटीपीसी के खुद के जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों के ऊपर लग रहे है और बात सीबीआई जांच तक पहुंचती नजर आ रही है तो ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन आरोपों पर ntpc प्रबंधन ने चुप्पी क्यों साध रखी और मीडिया के सवालों के जवाब देने से क्यों बच रहे है ??  उम्मीद की जा रही है कि इन मामलों को ntpc प्रबंधन गंभीरता से लेगा और मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखेगा ताकि यह स्पष्ट हो पाये कि महज यह आरोप है या फिर वाकई यह मामला सीबीआई जांच का बनता है और जांच में एक बड़े स्कैंडल का पर्दाफाश होता है .??

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