डेस्क खबरबिलासपुर

डंकाराम EXCLUSIVE : मरवाही में कलेक्टर की रेड, अमानक चावल पर सख्ती; बिलासपुर में सरकारी चावल की हेराफेरी पर कार्रवाई का इंतजार! बिलासपुर प्रशासन से सीधे सवाल .??



रिपोर्ट: अरविंद सिंह
डेस्क खबर बिलासपुर ./ मरवाही में कलेक्टर ने गोदाम पहुंचकर चावल की गुणवत्ता परखी, अमानक चावल लौटाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर बिलासपुर में सरकारी राशन की कथित हेराफेरी, परिवहन में गड़बड़ी और राशन के बदले नगद भुगतान की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गरीबों के हक का चावल किसी भी कीमत पर गुणवत्ता से समझौता करके नहीं बांटा जाएगा। इसी संदेश के साथ गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही


कलेक्टर विजय दयाराम के. ने 3 अक्टूबर को मरवाही स्थित नागरिक आपूर्ति निगम के गोदाम का औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर ने चावल की गुणवत्ता स्वयं परखी और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अमानक चावल की एक भी बोरी स्वीकार नहीं की जाए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टॉक, भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन पहुंचाने की व्यवस्था की जांच की। अमानक पाए गए चावल के लॉट को संबंधित मिलर को वापस भेजने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि गुणवत्ता में सुधार नहीं होने पर संबंधित मिलर्स और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


इस दौरान जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे और नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक धनंजय मदनकर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
मरवाही में गुणवत्ता पर सख्ती, बिलासपुर में निगरानी पर सवाल!
मरवाही में कलेक्टर की इस कार्रवाई ने बिलासपुर जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर उठ रही शिकायतों पर भी ध्यान खींचा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सरकारी चावल के कथित अवैध परिवहन, राशन की हेराफेरी और हितग्राहियों को अनाज के बदले नगद राशि दिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में वीडियो भी अनाज के बदले नगद भुगतान के सामने आए है बिलासपुर में अधिकांश राशन दुकानें किराए पर नियमों के विपरीत चल रही है।जबकि नियम के तहत सरकारी उचित मूल्य की दुकानों को किराए में देने का प्रावधान नहीं है। जिले के शहरी क्षेत्रों से लेकर  सरकारी चावल को ऑटो और पिकअप जैसे वाहनों के जरिए राइस मिलों तक पहुंचाया जाता है। वहीं, PDS परिवहन व्यवस्था में GPS निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए परिवहन रिकॉर्ड, GPS डेटा, स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी और संबंधित वीडियो की आधिकारिक जांच जरूरी है।


सवाल बिलासपुर प्रशासन से भी
यदि शिकायतों और वीडियो में किए जा रहे दावों की पुष्टि होती है, तो यह केवल राशन वितरण में अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि गरीब हितग्राहियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में सवाल है कि संदिग्ध परिवहन, राशन के बदले नगद भुगतान और सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? कितनी दुकानों, परिवहनकर्ताओं और संबंधित एजेंसियों की जांच की गई? GPS रिकॉर्ड और स्टॉक का मिलान कब होगा?
मरवाही के कलेक्टर ने गोदाम पहुंचकर गुणवत्ता की जांच की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। अब बिलासपुर में भी शिकायतों की निष्पक्ष जांच, रिकॉर्ड का सत्यापन और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत है।
गरीबों के राशन पर किसी का अवैध मुनाफा नहीं चलना चाहिए। सवाल सीधा है—बिलासपुर में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी पर जवाबदेही कब तय होगी? और कौन तय करेगा बिलासपुर कलेक्टर या फिर खाद्य विभाग .??
फिलहाल पूरे मामले में खाद्य अधिकारी अमृत कुजूर का कहना है कि राशन की हेराफेरी के सूचना और खबरों के बाद मामले की जांच की जाती रहेगी और कही कुछ भी पुख्ता जानकारी रहेगी तो योजनबद्ध तरीके से आगे अब चावल चोरी को रोकने के लिए सूचना पर तत्काल छापेमार कार्यवाही कर गड़बड़ी करने वाले चावल चोरों के खिलाफ खाद्य कानून के हिसाब से सख्त कार्यवाही की जाएगी ।

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