डेस्क खबर

नचनिया बना फर्जी पत्रकार…शराब,हंगामा और सोशल मीडिया—फर्जी पत्रकार विक्रमादित्य दुबे के खिलाफ लिखित शिकायत, शब्दों का गरिमा भूल नशेड़ी..पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल !




डेस्क खबर बलरामपुर ../वाड्रफनगर बस स्टैंड में कथित रूप से नशे की हालत में उत्पात मचाने के मामले में विक्रमादित्य दुबे के जेल जाने और बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद एक बार फिर उसके सोशल मीडिया वीडियो चर्चा में हैं। आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद भी वह शराब के नशे में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहा है।


स्थानीय स्तर पर विक्रमादित्य दुबे के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर लगातार विवाद सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वह कई बार पुलिस, आम नागरिकों और पत्रकारों के खिलाफ आपत्तिजनक अथवा आरोपात्मक भाषा का इस्तेमाल करता है। ज्ञात होगी उसके वीडियो को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह आदतन नशेड़ी है और बोलने वाली लिखने का भी अक्ल नहीं है।



पुलिस के पास शिकायतें लंबित होने का दावा

सूत्रों के अनुसार, वाड्रफनगर एवं बसंतपुर थाना क्षेत्र में विक्रमादित्य दुबे के खिलाफ विभिन्न शिकायतें लंबित होने की बात कही जा रही है। पुलिस द्वारा पूछताछ या बयान के लिए बुलाए जाने के बावजूद उसके उपस्थित नहीं होने का भी दावा किया जा रहा है। मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, यह सामने आना बाकी है।



पुलिस पर गंभीर आरोप, फिर आर्थिक मदद मांगने का दावा

विक्रमादित्य दुबे द्वारा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। वहीं, दूसरी ओर उसके द्वारा पुलिसकर्मियों से आर्थिक मदद मांगने और कथित तौर पर यह कहने की बात कही जा रही है कि उसके खाते में पैसे नहीं हैं। यदि यह दावा सही है तो पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक हो जाती है।


नशे और अन्य गतिविधियों को लेकर भी आरोप

स्थानीय लोगों द्वारा उसके खिलाफ नशे से जुड़ी गतिविधियों तथा कथित रूप से नाइट डांस और नशीले पदार्थों की आवाजाही से जुड़े आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन गंभीर आरोपों की पुष्टि संबंधित पुलिस जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।


पत्रकारिता की आड़ में विवाद?

विक्रमादित्य दुबे स्वयं को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करता है या किसी मीडिया संस्थान से अधिकृत रूप से जुड़ा है, इसकी भी संबंधित संस्थान अथवा प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि आवश्यक है। पत्रकारिता की पहचान का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस, या अन्य लोगों पर आरोप लगाना बिल्कुल ही अनुचित है। अब सवाल यह है कि वाड्रफनगर पुलिस के पास लंबित शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई है और सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रहे विवादित वीडियो एवं आरोपों की पुलिस जांच कब तक पूरी होगी?

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