

डेस्क खबर बिलासपुर../ प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर शहर के नगर निगम बिलासपुर के विकास भवन स्थित संपदा विभाग में करीब 25 वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी रिश्वतखोर लक्ष्मीकांत कोका को लेकर अब उसकी कथित संपत्ति की जांच की मांग उठने लगी है। आरोप है कि लंबे समय से संपदा शाखा में पदस्थ रहने के दौरान उसने आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति अर्जित की है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में ACB की कार्रवाई में उसे 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उसके खिलाफ केवल रिश्वत प्रकरण तक सीमित न रहकर आय से अधिक संपत्ति और संपत्ति के स्रोतों की भी जांच की जानी चाहिए।बताया विभाग में चर्चा है कि रिश्वत प्रकरण की जांच के साथ उसके बैंक खातों, जमीन-जायदाद, वाहन, नकदी और अन्य संपत्तियों के स्रोत की भी जांच की जाए।

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि ACB कार्रवाई के दिन उसके घर से कुछ लोग कथित तौर पर सोना-चांदी, नकदी और जमीन से जुड़े दस्तावेज लेकर जाते दिखाई दिए। यदि घर या आसपास लगे CCTV कैमरों में ऐसी गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं, तो जांच एजेंसी उनके फुटेज की जांच कर सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यह भी चर्चा है कि अक्टूबर में कर्मचारी की बेटी के विवाह में कथित तौर पर 25 से 30 लाख रुपए खर्च किए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उसकी घोषित आय और संपत्ति के मुकाबले इतनी बड़ी रकम के स्रोत क्या हैं?
अब निगाह ACB की अगली कार्रवाई पर है। क्या रिश्वत प्रकरण के साथ कथित आय से अधिक संपत्ति की भी जांच होगी या मामला केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगा? सूत्र दावा कर रहे है कि रिश्वतखोर निगम कर्मचारी आरोपी स्वास्थ्य संबंधी आधार पर अस्पताल में भर्ती होकर जमानत लेने का प्रयास कर सकता है और इसके लिए सेटिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ?
डंकाराम वेब पोर्टल यह स्पष्ट करता है कि उपरोक्त बिंदु आरोप एवं जांच की मांग के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं, न कि सिद्ध तथ्य के रूप में। संबंधित कर्मचारी या उनके प्रतिनिधि का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब देखना होगा कि संबंधित जांच एजेंसी रिश्वत प्रकरण के साथ कथित आय से अधिक संपत्ति के पहलू की भी जांच करती है या नहीं।

