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समझाइश के बावजूद नहीं माने युवक, पुलिस ने हिरासत में लेकर कराया मेडिकल नशे में वाहन चलाने की भी कार्रवाई



डेस्क खबर वाड्रफनगर../सार्वजनिक बस स्टैंड में शराब के नशे में हंगामा करना दो युवकों को भारी पड़ गया। पुलिस के अनुसार मौके पर पहुंची पेट्रोलिंग टीम ने दोनों युवकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने और विवाद की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर मेडिकल परीक्षण कराया और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तहत न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। बाद में दोनों जमानत पर बाहर आए।
मामला वाड्रफनगर बस स्टैंड का है। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलने पर सउनि रामजीत राम के नेतृत्व में पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। वहां विक्रमादित्य दुबे (24) और विष्णु पटेल (27), दोनों निवासी बरतीखुर्द, शराब के नशे में हंगामा करते मिले। पुलिस का दावा है कि समझाइश के बावजूद दोनों ने हंगामा जारी रखा और पुलिसकर्मियों से भी अभद्र व्यवहार किया।

ब्रीथ एनालाइजर से जांच, फिर अस्पताल में मेडिकल



मौके पर स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। ब्रीथ एनालाइजर से जांच के बाद दोनों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाड्रफनगर में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 170/126, 135(3) बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और न्यायालय में पेश किया।

वहीं विक्रमादित्य दुबे के खिलाफ शराब के नशे में मोटरसाइकिल चलाने के आरोप में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत अलग से कार्रवाई की गई।



कार्रवाई हुई तो पुलिस और पत्रकारों पर ही सवाल!

मामले में नया मोड़ तब आया जब जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद दोनों युवकों की ओर से पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों को लेकर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई। सवाल यह है कि यदि पुलिस की कार्रवाई गलत थी तो क्या मेडिकल जांच, ब्रीथ एनालाइजर और न्यायालय में पेशी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जाएंगे?

वहीं, किसी भी पत्रकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए। बिना प्रमाण आरोप लगाकर पत्रकारिता को कटघरे में खड़ा करना और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाना अलग विषय है, जबकि पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता का निर्धारण दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया से होता है।



पुराने विवादों का भी किया जा रहा दावा

पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से विक्रमादित्य दुबे के पूर्व में भी विवादों में रहने और न्यायालय परिसर में पुलिसकर्मियों से कथित अभद्रता करने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पुराने दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि दोनों युवकों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की, मेडिकल परीक्षण कराया, न्यायालय में पेश किया और एक आरोपी के खिलाफ नशे में वाहन चलाने को लेकर एमवी एक्ट की धारा 185 के तहत अलग कार्रवाई भी की।

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