


डेस्क खबर बिलासपुर./ मस्तूरी के ग्राम रलिया में NTPC सीपत के CSR मद से स्वीकृत 44 लाख 53 हजार 910 रुपये का श्मशान घाट निर्माण अब सवालों के घेरे में है। करोड़ों के विकास कार्यों के बीच यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि शिकायतकर्ता संगठन का आरोप है कि जिस जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है, उसका पहले विधिवत सीमांकन और चिन्हांकन तक नहीं कराया गया।
राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान घाट के लिए करीब 4 एकड़ जमीन निर्धारित होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद जमीन के एक छोटे हिस्से में बाउंड्रीवॉल निर्माण कराए जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं। आखिर पूरी भूमि का सीमांकन कराए बिना निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी? क्या निर्माण स्वीकृत स्थल और DPR के मुताबिक ही हो रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ होगा।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सिर्फ निर्माण स्थल ही नहीं, बल्कि पूरे सरकारी दस्तावेजों की जांच की मांग की है। संगठन ने DPR, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र की जांच की मांग की है।

साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सीमेंट, रेत, गिट्टी, ईंट और DPC की गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण तथा मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठाई गई है।
जिला अध्यक्ष अनिल कुमार पाली का कहना है कि मामला जनता के पैसे और ग्रामीण सुविधा से जुड़ा है। ऐसे में जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविकता सामने लाई जाए। ताकि ntpc से जारी राशि की जांच हो सके और आरोपों को लेकर इस निर्माण की जमीन से लेकर भुगतान तक की तस्वीर साफ हो पाये। इस मामले की जानकारी एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारियों को भी है लेकिन पूरा मामला संज्ञान में होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा जिसके कारण इन पैसों का जमकर मिलाकर बंटरबांट किया गया।
