डेस्क खबररायपुर

AIIMS दीक्षांत समारोह के निमंत्रण से बड़े नाम गायब, भाजपा नेताओं में क्यों बढ़ी नाराजगी?


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डेस्क खबर रायपुर स्थित एम्स के दीक्षांत समारोह को लेकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। दो सितंबर को होने वाले कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का नाम शामिल नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा एम्स सलाहकार समिति से जुड़े सांसद विजय बघेल, विधायक राजेश मूणत और महापौर मीनल चौबे का नाम भी अतिथियों की सूची में नहीं है। इसे लेकर भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों में नाराजगी की बात सामने आ रही है।

दो सितंबर को होगा एम्स का दीक्षांत समारोह

रायपुर एम्स के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल होंगे। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है। बैठक में कार्यक्रम को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवस्थित करने और मिनट टू मिनट कार्यक्रम तय करने के निर्देश दिए गए थे। एम्स के अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद रहे।

आमंत्रण पत्र में किन नेताओं के नाम शामिल हैं

सामने आए आमंत्रण पत्र में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सेवानिवृत्त के नाम दर्ज हैं।हालांकि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत कुछ अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम सूची में नहीं होने से भाजपा के भीतर सवाल उठ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी

आमंत्रण पत्र सामने आने के बाद भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि सांसद और विधायकों जैसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का मामला सामने आने पर इसकी शिकायत किस स्तर पर की जाए, यह स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को सार्वजनिक किया है।

संगठन और सरकार के बीच दूरी की भी चर्चा

इस घटनाक्रम के बीच भाजपा संगठन और सरकार के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पिछले करीब एक साल से संगठन के कुछ नेताओं और राज्य सरकार तथा केंद्रीय नेतृत्व के बीच इस तरह के मुद्दों को लेकर दूरी महसूस की जा रही है। हालांकि आमंत्रण पत्र में नाम नहीं होने के पीछे आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एम्स जैसे महत्वपूर्ण केंद्रीय संस्थान के कार्यक्रम में स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया और क्या इस मामले में आगे कोई स्पष्टीकरण सामने आएगा।

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