


डेस्क खबर बिलासपुर ./ नगर निगम में कथित 1.15 करोड़ के घूसकांड ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर कथित वीडियो वायरल होने और गंभीर आरोप सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया है। निगम का कहना है कि उनके आचरण से संस्था की छवि धूमिल हुई है, इसलिए यह कार्रवाई की गई।


पूरा मामला व्यापार विहार की व्यावसायिक योजना में जमीन लीज पर देने के टेंडर से जुड़ा बताया जा रहा है। राजेश देवांगन ने तत्कालीन महापौर रामशरण यादव पर आरोप लगाया है कि ‘गणेश ट्रेडर्स’ को नियमों के विपरीत टेंडर दिलाने के एवज में 1 करोड़ 15 लाख की रिश्वत ली गई। देवांगन का दावा है कि यह रकम तत्कालीन महापौर के करीबी बताए जाने वाले मुकेश पाठक के माध्यम से पहुंचाई गई थी।बताया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने अनियमितताओं की आशंका पर टेंडर पर रोक लगा दी थी। इसके बाद टेंडर निरस्त होने से कथित तौर पर रकम वापस करने का विवाद शुरू हुआ और मामला पुलिस तक पहुंच गया।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसमें राजेश देवांगन खुद पैसों के लेन-देन का जिक्र करते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग भी की है।
नगर निगम ने फिलहाल अपने अधिकारी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है, जबकि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच अभी बाकी है।दूसरी ओर, पूर्व महापौर रामशरण यादव ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कुछ मीडिया संस्थानों से बातचीत में कहा कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।अब इस हाई-प्रोफाइल घूसकांड में सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे किस पर कार्रवाई होती है।



