डेस्क खबर

भुगतान रोका, ठेकेदार ने की आत्महत्या ..जल जीवन मिशन में मचा बवाल … . सरकार और अधिकारियों पर संगीन आरोप .मौत के बाद फूटा गुस्सा , महाआंदोलन का किया ऐलान ../



डेस्क खबर रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित जल जीवन मिशन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दुर्ग के ठेकेदार गणेश्वर देशमुख की आत्महत्या के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ठेकेदार संघ का आरोप है कि महीनों नहीं, बल्कि एक साल से अधिक समय तक भुगतान रोककर अधिकारियों ने एक ठेकेदार को इस कदर आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल दिया कि उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।
संघ का कहना है कि गणेश्वर देशमुख अपने परिवार का खर्च कर्ज लेकर चला रहे थे। भुगतान के लिए लगातार विभाग के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन और नए नियम मिले। आर्थिक तंगी, बढ़ते कर्ज और विभागीय उपेक्षा ने आखिरकार उनकी जिंदगी छीन ली। मामला यहीं नहीं थमता। ठेकेदार संघ ने दावा किया है कि जल जीवन मिशन में काम कर रहे 8 से 10 अन्य ठेकेदार भी इसी तरह के आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। यदि सरकार और विभाग ने तत्काल लंबित भुगतान नहीं किया तो और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं और कई ठेकेदार लंबित भुगतान को लेकर जानलेवा कदम उठा सकते है। संघ ने जल जीवन मिशन के एमडी पर आरोप लगाया है कि वे भुगतान करने के बजाय लगातार नए-नए नियम लागू कर ठेकेदारों को परेशान करते हैं। भुगतान मांगने पर प्रताड़ित किया जाता है और काम से हटाने तक की धमकी दी जाती है। ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित मंत्री पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण ठेकेदारों की शिकायतों को लगातार अनदेखा किया गया। संघ का कहना है कि मंचों से बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भुगतान के लिए ठेकेदार दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
गणेश्वर देशमुख की मौत के बाद अब ठेकेदार संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि रायपुर के नीर भवन के सामने महाआंदोलन किया जाएगा और जब तक सभी लंबित भुगतान जारी नहीं होते, आंदोलन खत्म नहीं होगा। ठेकेदार की मौत के  विभागीय अधिकारियों और मंत्री पर लगाए गए ठेकेदार संघ द्वारा लगाए गए  आरोपों पर संबंधित विभाग या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ पाई है।

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