


बिलासपुर। मुंगेली जिले की सेवा सहकारी समिति मर्यादित निरजाम में धान खरीदी के दौरान सामने आई लाखों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2012-13 और 2013-14 की धान खरीदी में कुल लगभग 58 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी के आरोप लगने के बावजूद आज तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है। वहीं गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी बंशीलाल साहू वर्तमान में भी समिति के प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2012-13 में धान स्टॉक कमी के मामले में करीब 28.37 लाख रुपये तथा वर्ष 2013-14 में लगभग 29 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। मामले में सहकारिता विभाग द्वारा नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, लेकिन 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो जांच का अंतिम परिणाम सामने आया और न ही दोष तय हो सके।

जांच के नाम पर लंबा इंतजार–
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इतने लंबे समय से जांच लंबित रहना कई सवाल खड़े करता है। यदि आरोप निराधार थे तो संबंधित अधिकारी को क्लीन चिट क्यों नहीं दी गई, और यदि आरोपों में दम था तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है, लेकिन वर्षों से यही बात दोहराई जा रही है।

आय से अधिक संपत्ति का भी आरोप–
हाल ही में संभाग आयुक्त बिलासपुर और संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर को सौंपे गए आवेदन में बंशीलाल साहू पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि सेवा अवधि के दौरान उनके नाम पर विभिन्न स्थानों पर कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं, जिनकी वैधता और आय के स्रोत की जांच आवश्यक है।

बड़ा सवाल: आरोपों के बावजूद जिम्मेदारी क्यों?
मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब एक प्रबंधक के खिलाफ धान खरीदी में लाखों रुपये की कथित गड़बड़ी, वसूली नोटिस और आय से अधिक संपत्ति जैसे गंभीर आरोप वर्षों से जांच के दायरे में हैं, तब भी उसे समिति के प्रबंधन की जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई है? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे न केवल जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं बल्कि सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी असर पड़ता है।
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि धान खरीदी व्यवस्था में अनियमितताओं की शिकायतें वर्षों से सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई की गति बेहद धीमी रही है। ऐसे में अब लोगों की नजरें विभागीय जांच और प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं।
इसकी जांच चल रही है प्रतिवेदन भेजने की तैयारी है एक डॉक्यूमेंट का इंतजार है जैसी वह डॉक्यूमेंट आ जाएगा प्रतिवेदन बना करके भेज दिया जाएगा– रामकृष्ण साहू सीईओ, सहकारिता विभाग, बिलासपुर