


डेस्क खबर बिलासपुर./ 4 जून को तोरवा थाना क्षेत्र के बुधवारी बाजार में हुई आगजनी की घटना में फर्जी तरीक़े से लाखों रु के नुक़सान के बदले करोड़ो रु क्लेम लेने का बड़ा खेल खेला जा रहा है। आगजनी में डाली ड्रेसेज के गोदाम में लगी आग अब केवल आगजनी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि कथित तौर पर करोड़ों रुपये के फर्जी बीमा क्लेम की कोशिश के आरोपों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। मामले में कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है जिसने पूरे क्लेम को भी बड़ा फर्जीवाड़ा की तरफ मोड़ दिया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस स्थान पर आग लगी, वहां कोई इलेक्ट्रिकल पॉइंट ही नहीं था। रेलवे इलेक्ट्रिकल विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भी आग शॉर्ट सर्किट से नहीं बल्कि जानबूझकर लगाए जाने की आशंका जताई गई है। वहीं पूरे मामले में मीडिया के सामने तोरवा थाना प्रभारी द्वारा टालमटोल और सटीक जानकारी नहीं देने से और दिए गए अनाफिशियल बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायकर्ता का आरोप है कि आगजनी की घटना के दिन बुधवारी बाजार के व्यापारियों और तोरवा थाना प्रभारी कि मौजूदगी में डाली ड्रेसेज के संचालक द्वारा आग को रोकने के लिए कि कथित तौर पर मौके की चाबी उपलब्ध जानबूझकर उपलब्ध नहीं करवाई गई थी परिणाम स्वरूप दरवाजा तोड़ने में करीब आधा घंटा लग गया और आग के कारण सायकल दुकान संचालक को भारी नुक़सान झेलना पड़ा। इन परिस्थितियों ने पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि घटनास्थल का बीमा ही नहीं था, फिर भी करोड़ों रुपये का क्लेम लेने की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि आग में वास्तविक नुकसान महज 2 से 3 लाख रुपये का हुआ, लेकिन पहले सवा करोड़ और बाद में ढाई करोड़ रुपये तक का क्लेम तैयार करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं आगजनी के दिन डाली ड्रेसेज संचालक द्वारा खुद ही इस आग में कुछ लाख का नुकसान के मीडिया संस्थानों में उनके द्वारा दिए गए बयान के प्रमाणित साक्ष्य मौजूद है।
आरोप यह भी है कि कथित फर्जी क्लेम को मंजूरी दिलाने के लिए बड़ी सेटिंग और कमीशनबाजी की तैयारी की गई थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।


मामले ने तूल पकड़ने के बाद पुलिस और डाली ड्रेसेज के संचालक पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करोड़ों के कथित फर्जी क्लेम का मामला सामने आने के बाद संबंधित पक्ष मीडिया के सवालों से बचते नजर आए और स्पष्ट जानकारी देने से परहेज करते रहे। सूत्रों के अनुसार, अब मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंच चुका है। एसएसपी ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए तोरवा थाना प्रभारी को निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्य आधारित जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में फर्जी क्लेम तैयार करने या झूठे दस्तावेज बनवाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो डाली ड्रेसेज के संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।

गौरतलब है कि बिलासपुर में पहले से ही सर्पदंश मुआवजा घोटाले में डॉक्टर, वकील, पुलिसकर्मी और राजस्व विभाग के कर्मचारियों तक की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। ऐसे में यदि आगजनी के नाम पर भी फर्जी बीमा क्लेम की साजिश सामने आती है, तो यह प्रशासन और जांच एजेंसियों के लिए एक और बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। ऐसे में यदि आगजनी के नाम पर भी फर्जी बीमा क्लेम की साजिश सामने आती है, तो यह साफ संकेत होगा कि सरकारी मुआवजे से लेकर बीमा क्लेम तक, हर व्यवस्था को ठगने की कोशिश करने वाले गिरोह न्यायधानी में सक्रिय हैं। ऐसे में जरूरत है कि इस मामले की पूरी निष्पक्षता सख्त जांच हो और जांच रिपोर्ट के आधार पर झूठे क्लेम करने वाले और इसमें शामिल सिंडकेट के अन्य लोगों को बेनकाब कर उनके खिलाफ कानून के हिसाब से सख्त कार्यवाही हो ताकि बिलासपुर फर्जी क्लेमगढ़ न बन सके ।
अगले अंक में चौंकाने वाला खुलासा आखिर कौन है खेल का मास्टर माइंड और किसका मिला हुआ है संरक्षण पुख्ता दस्तावेजों के साथ ??