


डेस्क खबर बिलासपुर ./ चोरी का मोबाइल आरोपी के घर से बरामद होने के बाद भी बिलासपुर जिले की सीपत पुलिस द्वारा अपराध दर्ज नहीं होने से सीपत पुलिस कटघरे में खड़ी नजर आ रही है और पुलिस की ‘गुमशुदगी’ थ्योरी पर सवाल खड़े हो रहे है। पुलिसिया कार्यवाही से क्षुब्ध पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का दरवाजे पर न्याय की गुहार लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
सीपत थाना क्षेत्र में मोबाइल चोरी के एक मामले में पीड़ित अजय कुमार सूर्यवंशी ने आरोप लगाया है कि चोरी गए मोबाइल की बरामदगी और आरोपी की पहचान सामने आने के बावजूद पुलिस ने अब तक न तो एफआईआर दर्ज की है और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार 13 जून 2026 की रात अजय कुमार सूर्यवंशी अपने रिश्तेदार के घर सीपत क्षेत्र में रुके हुए थे। रात में उन्होंने वीवो और सैमसंग कंपनी के दो मोबाइल फोन कमरे में रखे थे, जो सुबह गायब मिले। काफी तलाश के बाद भी मोबाइल नहीं मिलने पर उन्होंने 14 जून को सीपत थाने पहुंचकर शिकायत की।

पीड़ित का आरोप है कि चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उन्हें गुम मोबाइल का आवेदन देने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने जशपुर लौटकर सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जहां से चोरी गए मोबाइल की लोकेशन ट्रेस हुई। जांच में घटना के दिन ही मोबाइल में नए सिम कार्ड सक्रिय होने की जानकारी सामने आई।पीड़ित के मुताबिक इस संबंध में पूरी जानकारी सीपत पुलिस को उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कथित आरोपी के घर पहुंची, जहां से मोबाइल बरामद होने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार बरामद मोबाइल नवागांव निवासी एक युवक के घर से मिला है। हालांकि पुलिस ने अभी तक चोरी का अपराध दर्ज नहीं किया है। पीड़ित का आरोप है कि एक मोबाइल क्षतिग्रस्त अवस्था में मिला है, जिससे उसे अतिरिक्त नुकसान भी हुआ है। इस मामले के सामने आने और फरियादी द्वारा लगाए गए आरोप के बाद मोबाइल चोरी मामले में सीपत पुलिस पर लापरवाही का आरोप लग रहे है और पखवाड़े भर बाद भी कार्रवाई शून्य होने के बाद सवाल खड़े ही रहे है कि जब शिकायतकर्ता ने खुद ही आरोपी को निकाला आरोपी, तब भी पुलिस न तो जागी है और ना ही अपराध दर्ज किया है जबकि CEIR से मिली लोकेशन, के आधार पर आरोपी के खिलाफ पुलिस को सुराग मिला था । उसके बाद भी आखिर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है इसका जवाब तो विभाग के उच्च अधिकारी ही दे सकते है ।
