


डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर के इतिहास में पहली बार आरटीओ कार्यालय के बाहर वर्षों से जमे दलालों और अवैध दुकानों के खिलाफ अब परिवहन विभाग ने मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी असीम माथुर ने कार्यालय के बाहर संचालित करीब 20 अवैध दुकानों को हटाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। आरटीओ कार्यालय के बाहर लंबे समय से ऑनलाइन सेवा केंद्र के नाम पर कई दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन टैक्स जमा करने, परमिट दिलाने और परिवहन विभाग से जुड़े विभिन्न कार्य कराने का दावा किया जाता है। आरोप है कि इन दुकानों का संचालन बिना किसी वैध अनुमति के किया जा रहा है। न तो नगर निगम से अनुमति ली गई है और न ही पंचायत से किसी प्रकार की स्वीकृति प्राप्त है।
हैरानी की बात यह है कि कुछ दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों के बाहर खुद को आरटीओ का सलाहकार या प्रतिनिधि तक लिख रखा है, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। इसी तरह की शिकायतों और बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए आरटीओ असीम माथुर ने सख्त रुख अपनाया है।

आरटीओ का कहना है कि इन अवैध दुकानों की वजह से बिलासपुर-बलौदाबाजार मुख्य मार्ग पर लगातार जाम की स्थिति बनती है। इसके अलावा कार्यालय आने वाले आवेदकों को बीच रास्ते में रोककर उनसे मनमाना शुल्क वसूले जाने और गुमराह करने की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।
दलालों की पकड़ तोड़ने की पहल
बिलासपुर में यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी आरटीओ अधिकारी ने खुले तौर पर दलाल तंत्र के खिलाफ कार्रवाई की पहल की है। वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं कि कार्यालय के बाहर बैठे बिचौलिए आम लोगों को अपने प्रभाव में लेकर विभागीय काम करवाने के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूलते हैं।

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में आवेदकों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि विभाग के भीतर उनकी “सेटिंग” है और अतिरिक्त पैसे देकर काम जल्दी कराया जा सकता है। अब आरटीओ द्वारा शुरू की गई इस कार्रवाई को विभाग में व्याप्त दलाली की परंपरा पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल देखना होगा कि इस पत्र पर कलेक्टर स्तर पर कब तक कार्यवाही होती है और कार्यालय के बाहर वर्षों से जमे अवैध कब्जों और दलाल तंत्र
को खत्म किया जाता है।