बिलासपुर में बिजली चोरों के लिए खुशखबरी ,अब बिजली चोरी पर एफआईआर नहीं, अब कोर्ट में परिवाद दायर करेगा बिजली विभाग! करोड़ो के सरकारी काम में रसूखदार बिजली चोर पर सिस्टम क्यों मेहरबान ??



डेस्क खबर बिलासपुर./ अब बिलासपुर जिले में चोरी करने पर थाने में बिजली चोरों के खिलाफ सीधे एफआईआर नहीं दर्ज होगी बल्कि बिजली चोरी के मामले में उच्च अधिकारियों के निर्देश पर बिजली चोरी करने वाले आरोपियों के खिलाफ बिजली विभाग अब कोर्ट में परिवाद तैयार करेगा। सिरगिट्टी क्षेत्र में करोड़ो रु की लगत से चल रहे नाली निर्माण के कार्य में ट्रांसफार्म से भगवती कंस्ट्रक्शन द्वारा बिजली चोरी मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं करवाने के सवाल पर सिरगिट्टी बिजली विभाग के अधिकारी का जवाब था। दरअसल सिरगिट्टी में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन नाली परियोजना अब विकास से ज्यादा विवादों के कारण सुर्खियों में है। सरकारी ट्रांसफॉर्मर से कथित बिजली चोरी कर निर्माण कार्य कराने का वीडियो सामने आने के बाद बिजली विभाग ने करीब 77 हजार का जुर्माना लगाने की बात तो कही, लेकिन आज तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। अब जानकारी मिल रही है कि पुलिस में अपराध दर्ज नहीं होने के कारण विभाग को कोर्ट में परिवाद दायर करने की तैयारी करनी पड़ रही है। सिरगिट्टी जोन में पदस्थ विभाग के अधिकारियों की माने तो इस मामले में वे कई बार ठेकेदार प्रशांत मिश्रा के खिलाफ सिरगिट्टी थाने मे कई बार चक्कर लगाए लेकिन पुलिस द्वारा दिलचस्पी नहीं लेने के कारण रसूखदार ठेकदार के खिलाफ एफआई दर्ज नहीं हो पाई।
मामले के जानकारों का कहना है कि विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत बिजली चोरी पाए जाने पर विभाग द्वारा आकलन (डिमांड) की कार्रवाई के साथ पुलिस में अपराध दर्ज कराना भी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। ऐसे मामलों में जांच के बाद पुलिस अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाती है। लेकिन सिरगिट्टी के इस मामले में स्थिति उलट दिखाई दे रही है।

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण एजेंसी भगवती कंस्ट्रक्शन के संचालक के खिलाफ अपराध दर्ज कराने के लिए रिपोर्ट तैयार कर कई बार सिरगिट्टी थाने भेजी गई, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि थाना प्रभारी से मुलाकात नहीं हो पाई और अन्य पुलिसकर्मियों ने भी थाना प्रभारी के निर्देश का हवाला देकर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई।

इधर, जूनियर इंजीनियर ने भी स्पष्ट किया कि उनका दायित्व बिजली व्यवस्था और तकनीकी कार्यों का है, न कि बार-बार थाने के चक्कर लगाना। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास करना पड़ रहा है। वही इस मामले में सिरगिट्टी थाना प्रभारी के अनुसार अब तक इस तरह का कोई मामला थाने नहीं आया है और यदि कोई ऐसा मामला या शिकायत आती है तो तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रतिवेदन पर संबंधित आरोपी पर मामला दर्ज किया जाएगा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि पुलिस अपराध दर्ज नहीं करती, तो विभाग को न्यायालय में परिवाद दायर करना पड़ता है। हालांकि, यह प्रक्रिया पुलिस जांच से अलग होती है और न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करता है।

इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल यह भी है कि विभाग ने ₹77 हजार की पेनल्टी लगाए जाने का दावा तो किया, लेकिन डिमांड नोटिस और जुर्माने की प्रति मीडिया को उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

गौरतलब है कि इसी नाली निर्माण को लेकर पहले भी गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं। निर्माण के बीच बिजली के खंभे नहीं हटाए गए, सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगे और बिजली विभाग ने संभावित हादसे की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद काम जारी रहा। अब बिजली चोरी का वीडियो सामने आने के बाद पूरा मामला फिर चर्चा में है।

सबसे बड़ा सवाल यही है— अगर बिजली चोरी के आरोप में एक आम नागरिक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो करोड़ों रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट में कथित बिजली चोरी के मामले में कार्रवाई अब तक अधर में क्यों है? क्या कानून सबके लिए समान है या फिर रसूख के आगे कार्रवाई की रफ्तार थम जाती है? अब सभी की नजर पुलिस और बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। हालांकि इस मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों को हमने सिरगिट्टी थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाने में दिलचस्पी भी दिखाई लेकिन उन्होंने फाइल डिवीजन ऑफिस में भेजने और बड़े अधिकारियों के निर्देश का पालन करने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। वही सूत्रों का कहना है कि सिरगिट्टी में करोड़ों की नाली का काम नियमों को ताक पर रख कर किया गया है और इसकी जानकारी निगम के जोन अधिकारियों को भी है और बकायदा इसके लिए रसूखदार ठेकेदार की कई नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन वे रद्दी की टोकरी में पड़े हुए है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर रसूखदार को किसका संरक्षण मिला हुआ है विभागीय या राजनैतिक संरक्षण ??