गौमाता की मौत पर सियासत” — कांग्रेस ने निकाली शव यात्रा, बीजेपी बोली- जीवित लोगों का अंतिम संस्कार पाप..कांग्रेसी और भाजपाइयों में जमकर हुई झड़प !

डेस्क खबर ../ बेमतरा जिले के उसलापुर-झिरिया में कथित गौवंश मौत मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। सैकड़ों मवेशियों की मौत के आरोपों को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। मामले को लेकर सोमवार को उसलापुर में जमकर हंगामा, नारेबाजी और झूमाझटकी देखने को मिली। कांग्रेस का आरोप है कि लगातार हिंदुओं के मां का दर्जा प्राप्त गौमाता की लापरवाही के चलते मौत हो रही है और बीजेपी खामोश है । गौरतलब है कि जिले में लगातार हो रही गायों की मौत के मुद्दे पर युवा कांग्रेस महासचिव एवं जनपद सदस्य दीपक दिनकर पहले से ही सिग्नल चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कांग्रेसियों ने उसलापुर में बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, गौ सेवा आयोग अध्यक्ष विश्वेश्वर पटेल और पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालने पहुंचे।
शव यात्रा की सूचना मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उसलापुर-झिरिया स्थित वन विभाग परिसर में बड़ी संख्या में गौवंशों को रखा गया था, जहां पिछले दो-तीन महीनों में लगभग 300 मवेशियों की मौत हो गई। कांग्रेस का दावा है कि मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने भी 200 से अधिक मौतों की पुष्टि की थी, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर गौवंश की मौत को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन जीवित लोगों की शव यात्रा निकालना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के खिलाफ है। भाजपा ने इसे “पाप” और “ओछी राजनीति” बताया है। बीजेपी का आरोप है कि जीवित बेटा ही पिता की शव यात्रा निकाल सकता है लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर हिंदू धर्म का अपमान कर रही है ।
लगातार हो रही गौवंशो की मौत के बाद मचे इस राजनैतिक घमासान के बाद सबसे बड़ा सवाल अब प्रशासन पर खड़ा हो रहा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में गौवंशों की मौत हुई, तो जिम्मेदार कौन है?
और अगर मौत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं है, तो जिला प्रशासन अब तक सच्चाई क्यों नहीं बता पा रहा?
धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान के बाद प्रशासन ने एक बार फिर जांच टीम गठित कर दी है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि आखिर गौवंशों की मौत का सच क्या है।