

डेस्क खबर बिलासपुर./ छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के खिलाफ लाए गए कठोर कानून छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026-27 को लेकर बिलासपुर में आज हिंदू संगठनों ने जोरदार जश्न मनाया। बजरंग दल समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शहर के देवकीनंदन चौक पर एकत्रित हुए, जहां ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना और आतिशबाजी कर खुशी जाहिर की गई। जश्न में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के सख्त कानून की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उनका आरोप था कि प्रदेश में लगातार धर्मांतरण की घटनाएं सामने आ रही थीं और कड़ा कानून नहीं होने के कारण इसमें शामिल लोग आसानी से बच निकलते थे। ऐसे में इस विधेयक के लागू होने से अब इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सकेगी। गौरतलब है कि नए कानून के अनुसार अवैध धर्मांतरण पर 7-10 साल की जेल और ₹5 लाख तक का जुर्माना, जबकि सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने बताया कि वे लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार के इस फैसले को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि इससे समाज में संतुलन और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित होगी।
कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय सनातन संस्कृति और परंपराओं की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनका मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद धर्मांतरण के मामलों में कड़ी कार्रवाई होगी और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जा सकेगा। भले इस कानून को लेकर प्रदेश में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, लेकिन बिलासपुर में हिंदू संगठनों ने इस कानून लेकर उत्साह और समर्थन साफ तौर पर दिखाया।