“स्कूल आ पढे बर” सरकार के इस नारे को ठेंगा दिखाता शिक्षा विभाग….बदहाल स्कूल, असुरक्षित वातावरण में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

कोरबा। केसलपुर गांव में संचालित सरकारी प्राथमिक स्कूल की बदहाली नौनिहालों के लिए मुसीबत बन गई है। स्कूल में न तो पीने के लिए पानी माकूल ब्यवस्था है और न ही शौचालय की। जंगल से घिरे स्कूल में बाउंड्रीवाल तक ही है। स्कूल में जंगली जानवरों के भय का वातावरण बना हुआ है बावजूद इसके विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
कोरबा विकासखंड के केसलपुर गांव में संचालित सरकारी प्राथमिक स्कूल चारो तरफ से जंगल से घिरा हुआ है।विद्यालय में सुरक्षा के कोई इंतजाम नही है। जंगली जानवरों के खतरे के बीच जान जोखिम में डालकर नौनिहालों को अध्ययन करना पड़ रहा है। इतना ही नही यहां न तो शुलभ शौचालय है और न ही पानी की ब्यवस्था। परिसर में एक हेण्डपम्प जरूर है लेकिन उसमे का पानी पीने योग्य नही है। ऐसे में स्कूल के शिक्षकों और बच्चो को पीने का पानी घर से ही लाना पड़ता है। स्कूल में बच्चो की दर्ज संख्या 40 के करीब है। जो विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे है। शौचालय नही होने से शिक्षिकाओं और छात्राओ को अधिक परेशानी होती है। हालांकि इस संबंध में प्रधानपाठिका गीता यादव ने विभागीय रूप से पत्रब्यवहार भी किया, लेकिन कोई फायदा नही हुआ। सालों से अव्यवस्थाओं के बीच आदिवासी बच्चे अध्ययन करने को मजबूर हैं लेकिन जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
एक शिक्षिका के भरोसे स्कूल

केसलपुर में संचालित सरकारी प्राथमिक स्कूल में बच्चो की दर्ज संख्या 40 के करीब है। यहां शिक्षिकाओं की पदस्थापना है। मगर लंबे समय से गीता यादव के भरोसे ही स्कूल का संचालन लिया जा रहा है। गीता यादव अपने स्तर पर बच्चो को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रही है, लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के कारण उनकी मुसीबत भी बढ़ गई है। जंगल के बीच अकेले ही बच्चो को संभालना किसी चुनौती से कम नही है।
वैसे तो जिम्मेदार अधिकारी बदहाल स्कूलों का हाल जाने की जहमत भी नहीं उठाते लेकिन जब बालको पुलिस ने स्कूल में खाकी के रंग स्कूल के संग कार्यक्रम का आयोजन किया तो कोरबा सीईओ संजय अग्रवाल बतौर अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए इस दौरान स्कूल की समस्या के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने पानी की समस्या होने की बात से अनभिज्ञता जाहिर की उन्होंने माना कि जंगल के बीच केसलपुर के प्राथमिक स्कूल में बाउंड्रीवाल की बेहद जरूरत है। उन्होंने जल्दी काम शुरू किए जाने का भरोसा जरूर दिया।