मीडिया की बयान देना विपणन अधिकारी को पड़ा भारी ! 7 करोड़ धान घोटाले मामले में डीएमओ अभिषेक मिश्रा निलंबित.! बयान जमकर हो रहा सोशल मीडिया में वायरल .!!

डेस्क खबर ./ कवर्धा जिले में सामने आए करीब 7 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान शॉर्टेज मामले में मीडिया को दिया बयान विपणन अधिकारी को महंगा पड़ गया । अधिकारी के मीडिया में दिए गये बयान के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा गया था । मामला प्रदेश स्तर तक गूंजने के बाद अब राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) अभिषेक मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई रायपुर स्थित राज्य स्तर के प्रबंध संचालक द्वारा मीडिया में भ्रामक जानकारी देने और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी के आरोप में की गई है। मीडिया के सवाल पर अधिकारी ने धान शार्टेज होने के लिए चूहों और दीमक को जिम्मेदार बता दिया था ।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024–25 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान कवर्धा के चारभाठा संग्रहण केंद्र में रखा गया था। वर्ष 2026 की खरीदी प्रक्रिया से पहले जब भौतिक सत्यापन कराया गया, तब लगभग 26 हजार क्विंटल धान कम पाया गया। इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आंकी गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जांच के दौरान संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रितेश पांडेय की भूमिका संदिग्ध पाई गई। साथ ही सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के संकेत भी सामने आए, जिसके बाद उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच जारी है और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
इस बीच मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए डीएमओ अभिषेक मिश्रा द्वारा धान की कमी का कारण मौसम, चूहे और दीमक को बताया गया, जिसकी चारों ओर तीखी आलोचना हुई। विपक्षी दलों ने इसे भ्रष्टाचार को ढंकने का प्रयास बताते हुए सरकार पर दबाव बनाया। बयान को गैर-जिम्मेदाराना मानते हुए अंततः राज्य प्रबंधन ने निलंबन की कार्रवाई की। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कड़ी कार्रवाई संभव है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन और किसानों की उपज से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गुमराह करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।