
डेस्क खबर नई दिल्ली। छातीसगढ के बलौदा बाजार आगजनी और हिंसा मामले मे सुप्रीम कोर्ट ने पहली जमानत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपों का सामना कर रहे नारायण मिरी को जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और माननीय न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने की।


नारायण मिरी पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 435, 436, 427, 186, 333, 353 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 व 4 के तहत अपराधों का आरोप है। उनकी जमानत याचिका को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने 2 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की।


सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने उनके कारावास की अवधि और मामले की परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। कोर्ट ने मिरी के जून 2024 से जेल में होने और समग्र तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि जमानत का मामला बनता है।
अदालत ने निर्देश दिया कि नारायण मिरी को संबंधित न्यायालय द्वारा तय की जाने वाली सामान्य शर्तों पर तुरंत जमानत पर रिहा किया जाए। साथ ही, यह मामला विशेष अनुमति याचिका और लंबित आवेदनों के निपटारे के साथ समाप्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नारायण मिरी को राहत मिली है, जो लंबे समय से जेल में बंद थे। साथ ही इस मामले मे बंद अन्य आरोपियों को भी इस फैसले के बाद जमानत मिलने की संभावना बढ़ गई है।