डबल इंजन वाली सरकार के प्रदेश में खिलाड़ियों की दुर्दशा .!
खिलाड़ियों ने किया टायलेट के पास बैठकर सफर .!
कपकपाती ठंड में गंदगी के पास फर्श में दिखे होनहार खिलाड़ी .!
वीडियो सामने आने से उठे सवाल ..!
खिलाड़ियों की दुर्दशा का आखिर जिम्मेदार कौन .?

डेस्क खबर – केंद्र और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी प्रदेश में खिलाड़ियों के हाल जस के तस नजर आ रहे है । जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते छत्तीसगढ़ के होनहार खिलाड़ियों को दिल्ली से छत्तीसगढ़ तक का सफर ट्रेन के फर्श में बैठकर तय करना पड़ा । राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने गए जिमनास्ट के इन खिलाड़ियों को प्रदेश प्रबंधक और रेलवे अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही का शर्मनाक खामियाजा उठाना पड़ा । रुह को कपा देने सर्द ठंड के बीच राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने गए खिलाड़ियों के लौटने का रिजर्वेशन कन्फर्म नही होने की वजह से दिल्ली से छत्तीसगढ़ का करीब 17 घंटो से ज्यादा का सफर टॉयलेट और ट्रेन के दरवाजे के बीच फर्श में बैठकर करना पड़ा । संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सफर कर रहे खिलाड़ियों को दुर्दशा का वीडियो में साफ साफ दिखाई दे रहा है की रायपुर, दुर्ग ,बिलासपुर सहित कई जिलों के जिमनास्ट खिलाड़ी गंदगी के बीच सफर कर रहे है । इतना ही नहीं बाथरूम और वास वेसिन बुरी तरह से गंदे थे और इनसे गंदी असहनीय बदबू भी आ रही थी लेकिन अधिकारियों को लापरवाही के कारण इन खिलाड़ियों को भयानक सर्दी में ठंडे फर्श और बेसिन के पास बैठकर यात्रा करनी पड़ी ।
18 दिसंबर से 23 दिसंबर तक देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली 67वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीडा प्रतियोगिता में जिमनास्टिक के 14 ,17 एवं 19 वर्ष आयु वर्ग के जिमनास्टिक खिलाड़ि राष्टीय स्तर पर आयोजित प्रतिस्पर्धा में भाग लेने दिल्ली गई हुई थी। इसमें गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की 13 जिमनास्टिक खिलाड़ियों सहित छत्तीसगढ़ के 51 खिलाड़ी जो अलग-अलग जिलों से है को भाग लेने गई थीं। 51 खिलाड़ियों का यह दल 22 दिसंबर को संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से वापस छत्तिसगढ़ लौटना था , गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले सहित छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है परंतु राष्ट्रीय शालेय क्रीडा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी 51 खिलाड़ी छात्र-छात्राओं का रिजर्वेशन समय पर करना था पर इसे खेल विभाग और प्रशासन की बड़ी चूक ही कहेंगे कि खिलाड़ियों का कैलेंडर जारी होने के बावजूद पूर्व से ही इन खिलाड़ियों का रिजर्वेशन नहीं कराया गया जिसकी वजह से कोच सहित किसी भी खिलाड़ी का रिजर्वेशन कंफर्म नहीं हो पाया, नतीजा यह राष्ट्रीय खिलाड़ी पर ट्रेन की फर्श पर बैठकर वापसी की यात्रा तय करनी पड़ी, दुर्भाग्य जनक बात यह है कि इन बच्चों को सुरक्षित दिल्ली ले जाने और वापस छत्तीसगढ़ पहुंचने का जिम्मा जिस प्रबंधक को मिला था वह दो दिन पहले ही 20 दिसंबर को खिलाड़ियों को दिल्ली में छोड़ कर वापस पेण्ड्रा अपने घर लौट आई,।पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन में उतरने तक पेंड्रा के 13 खिलाड़ी और दुर्ग और बिलासपुर के बाकी सभी खिलाड़ी इसी तरह ठंड में ठिठुरते सफर करते रहे, खिलाड़ी जब पेंडा रोड रेलवे स्टेशन में उतरे तो बुरी तरह खांस रहे थे
उन्होंने बताया कि रिजर्वेशन नहीं मिलने से पूरी रात वे खा और सो नहीं पाए और टॉयलेट के पास जहां काफी बदबू थी वहीं बैठकर पूरी रात सफर किया है, कहने को तो इन छात्रों के साथ दो कोच भी थे पर जैसे ही पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन पहुंचा उन्हें उतार कर वह भी चले गए, महिला खिलाड़ी होने की वजह से अकोला पूर्व माध्यमिक शाला की एक महिला शिक्षक जो संरक्षक के रूप में गई थी वह ही इन छात्रों के साथ अंतिम रूप से मौजूद रही उन्होंने भी पूरी व्यवस्था के लिए जिमनास्टिक के प्रबंधक को ही जिम्मेदार ठहराया… पूरे मामले पर जब प्रदेश प्रबंधक सीमा डेविड से बात की गई तो उन्होंने टिकट कन्फ
र्म ना होने का ठीकरा रेलवे प्रशासन के सिर ही फोड़ दिया,वहीं शासन द्वारा जारी 3 लाख 21 हजार रुपए के फंड को भी ना काफी बता दिया…
वजह जो भी हो लेकिन खिलाड़ियों के इस सफर की तस्वीरों ने फिर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए है .? की भले देश और तमाम प्रदेश भर में खेलो को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को बेहतर व्यवस्था देने और * खेलेगा देश बढ़ेगा देश *का दावा सरकारें करती रहती है लेकिन ऐसी त्सवीरे सरकार को आइना दिखाने के लिए काफी है , की जिम्मेदार कितने लापरवाह है जिनका खामियाजा देश के होनहार खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है और प्रदेश के खिलाड़ियों को शर्मशार होना पड़ रहा है । खैर देखना होगा कि होनहार खिलाड़ियों की इस दुर्दशा की तस्वीर सामने आने के बाद इन सब के लिए किसकी जवाबदेही तय की जाती है ? और खिलाड़ियों के बहाने खेल जगत को शर्मिंदा करने वाले दोषी अधिकारियों पर कब कार्यवाही होती है ? ताकि भविष्य में ऐसी तस्वीर सामने न आ सके और प्रदेश के खिलाड़ियों को उचित सम्मान मिल सके और प्रदेश में डबल इंजन ( मोदी और विष्णुदेव ) की सरकार में प्रदेश के खिलाड़ियों को तस्वीर और तकदीर को बदला जा सके ।