छत्तीसगढ़

चर्चित विवादित राकेश चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त आईएफएस ) आख़िरकार बनाये गए जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष!!!

रायपुर।छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की सारी हदे पार कर दी गई है।14 नवम्बर को छत्तीसगढ़ शासन ने आदेश निकाला है जिसमें राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष पद पर वन विभाग के चर्चित रिटायर्ड आईएफएस राकेश चतुर्वेदी की नियुक्ति हुई है।4 साल तक वन विभाग को लूटने के बाद अब इस महाभ्रष्ट और वसूलीबाज अधिकारी को जैव विविधता बोर्ड को लूटने के लिए बैठा दिया गया है।जैसा की खबरें आ रही है कि ये ED के हिट लिस्ट में है, बावजूद इसके शासन ने राकेश चतुर्वेदी को पोस्ट रिटायरमेंट का गिफ़्ट दे दिया है।

हाल में 30 सितम्बर को राकेश चतुर्वेदी पीसीसीएफ के पद से सेवानिवृत्त हुए है।सोशल मीडिया में कई रेंजर के निलम्बन से बहाली के लिए रिश्वत लेते हुए की खबरें चली थी जिसमें देखा जा सकता है राकेश चतुर्वेदी नोटो का बंडल बटोर रहे है।इन रेंजर की हाल ही में बड़े बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में विधानसभा के सदन में निलम्बन की घोषणा हुई थी।पर राकेश चतुर्वेदी द्वारा अपने विदाई के दिन ही बहाली कर दिया गया।मरवाही और बिलासपुर वनमंडल में भ्रष्टाचार के इतने बड़े मामले थे की विधानसभा में उठाया गया और इन रेंजरो की निलम्बन की घोषणा हुई पर 3 महीनो में ही इनको पीसीसीएफ ने अपने विदाई के ही दिन बहाल कर दिया।मंत्री तक से इसके लिए पर्मिशन नहीं लेना समझा।

राकेश चतुर्वेदी ने चार साल में वन विभाग की हालत बद से बदतर कर दिया।जब से केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ वन विभाग को कैम्पा मद में 5,700 करोड़ का गिफ़्ट दिया तब से राकेश चतुर्वेदी का खुल्लम खुल्ला खेल चालू हो गया।पीसीसीएफ का 3.25 % फ़िक्स हो गया।समय समय पर विभाग में उच्च अधिकारियों को प्रतिशत की खबरें आती रही है।कभी अधिकारी द्वारा रेंजर को बुला के वसूली तो कभी ठेकेदारों से खुलआम वसूली की खबरें आती रही है।राकेश चतुर्वेदी ये सब में मास्टर थे। डिप्टी रेंजर तक को अपने बँगले बुला के पैसे ले लेते थे।सम्भवतः इसी कारण से आज अधिकाँश रेंज में रेंजर के जगह डिप्टी रेंजर प्रभार में है।विभाग में कुछ ख़ास ठेकेदारों को ही काम देने की खबरें भी आती रही है।ट्रान्स्फ़र पोस्टिंग का तो वनविभाग में नया धंधा चालू हो गया। सूत्रों की माने तो राकेश चतुर्वेदी ने डीएफओं का रेट 25 से 50 लाख तक फ़िक्स किया हुआ था।इसका नतीजा ये हुआ कि प्रभारी डीएफओ बनने की होड़ मच गयी।विभाग में नियम विरुद्ध एक स्तरहीन कर्मचारी एसडीओं को वनमंडल के प्रभार में बैठाया गया और डायरेक्ट आईएफएस को लूपलाइन में बैठाने का रिवाज चालू हो गया।बाद में मंत्री के बदनामी होने के बाद मंत्री ने इस प्रथा को ख़त्म किया।

पर्यावरण संरक्षण मंडल में अध्यक्ष बनने के लिए 20 करोड़ तक का ऑफ़र किए थे।बक़ायदा एक न्यूज़ चैनल में अपने पीसीसीएफ पद को छोड़के अध्यक्ष बनने तक का ऐलान कर आए थे। इसके बाद इस विवादित अधिकारी ने रेरा का अध्यक्ष बनने के लिए भी ज़ोर लगाया।उसके लिए करोड़ो ऑफ़र किया पर बन नहीं पाए।अंततः सरकार ने इस विवादित को इनके 4 साल के चाटुकारिता के लिए जैव विविधता अध्यक्ष पद का गिफ़्ट दिया।

इससे पहले चतुर्वेदी राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुए थे आरा मिल कांड से।तब वो रायपुर के सीएफ थे और मुख्य आरोपी भी।सभी डीएफओ से आरा मिल के फ़र्ज़ी इन्स्पेक्शन दिखा के शासन को करोड़ों का चूना लगाया।इसके वजह से चतुर्वेदी का लगभग 15 साल तक प्रमोशन रुका रहा।बाद में राजनीतिक रसूख़ के चलते राज्य सरकार से क्लीयर हो गए।जबकि इसी केस में फसे हेमंत पांडेय आज तक फ़से है और उनका करोड़ों का वसूली आदेश निकला हुआ है।जब रेंजर तक को अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया गया तो उच्च अधिकारी कैसे उसी केस में बरी हो गए ?? ये बड़ा सवाल है ?

error: Content is protected !!