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EXCLUSIVE : आगजनी की राख में करोड़ों के क्लेम का खेल? पहले ढाई करोड़, फिर सवा करोड़ का दावा! डाली ड्रेसेज के बोर्ड बदलने पर सवाल,   शिकायतकर्ता का दावा—साक्ष्य देने के बाद भी नहीं हुआ बयान, आखिर किसके इंतजार में बैठी है तोरवा पुलिस?



डेस्क खबर बिलासपुर./ बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्रांतर्गत बुधवारी बाजार में आग लगी, दुकान को नुकसान हुआ और फिर शुरू हुई बीमा क्लेम की कहानी! अब इस कहानी में दुकान के नाम से लेकर नुकसान की राशि तक कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। 4 जून को हुई आगजनी की घटना के बाद डाली ड्रेसेज के संचालक पर करोड़ों रुपये का कथित फर्जी बीमा क्लेम लेने की कोशिश का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में सुनियोजित गड़बड़ी की आशंका जताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। लेकिन आरोपों की जांच कहां तक पहुंची, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।



पहले ढाई करोड़, फिर सवा करोड़! आखिर दावे की कहानी क्या है?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, आगजनी के बाद कथित तौर पर पहले करीब ढाई करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया, बाद में यह राशि घटाकर लगभग सवा करोड़ रुपये बताई गई। सवाल यह है कि नुकसान की राशि में इतना अंतर क्यों आया? क्या नुकसान का आकलन दोबारा किया गया था, क्या कोई दस्तावेज संशोधित हुआ और बीमा कंपनी ने दावे की जांच में क्या पाया? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और बीमा कंपनी की आधिकारिक जानकारी से ही सामने आ सकता है।


डाली ड्रेसेज से मुस्कान ड्रेसेज और फिर पुराना बोर्ड!
इस मामले में दुकान के नाम को लेकर भी विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डाली ड्रेसेज का बोर्ड हटाकर इस दुकान को मुस्कान ड्रेसेज बताने की हर संभव कोशिश की गई और आगजनी में जले गोदाम को डाली ड्रेसेज बताने की कोशिश भी की लेकिन अब विवाद सामने आने और पोल खुलने के डर से के बाद दुकान पर फिर से डाली ड्रेसेज का बोर्ड लगा दिया गया।

अगर दुकान के नाम में बदलाव हुआ, तो उसके पीछे की वजह क्या थी? क्या इसका बीमा क्लेम से कोई संबंध था या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था? इन सवालों की जांच जरूरी है। केवल बोर्ड बदलने से किसी तरह की धोखाधड़ी साबित नहीं होती, लेकिन परिस्थितियों और दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना मामले को नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए।


एसएसपी के निर्देश, फिर भी जांच पर सवाल क्यों?
मामले का सबसे गंभीर पहलू पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ता के आरोप हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिलासपुर एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन तोरवा थाना प्रभारी को जांच कर वास्तविकता सामने लाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का दावा है कि महीनों बीतने के बाद भी तत्कालीन तोरवा थाना प्रभारी ने कोई रुचि नहीं दिखाई और न ही उनका कोई बयान दर्ज  किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह कई बार अकेले और बुधवारी बाजार के व्यापारियों के साथ थाने पहुंचा, लेकिन हर बार उसे बिना बयान दर्ज कराए वापस लौटना पड़ा। उसका दावा है कि कथित गड़बड़ी से जुड़े साक्ष्य भी उसके पास मौजूद हैं। लेकिन उसके बाद भी पुलिस फर्जी क्लेम का दावा करने वाले डाली ड्रेसेज के संचालक के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रही है। अगर शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि पुलिस को गुमराह कर फर्जी क्लेम के दावे को शिकायत पर अब तक कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हुई? सूत्रों की माने तो मामले में शिकायतकर्ता पर पुलिस विभाग के अफसर ने भी इस मामले से दूर रहने का दबाव बनाने की भी कोशिश की गई थी। लेकिन  उपलब्ध दस्तावेजों की जांच हुई या नहीं? संबंधित लोगों से पूछताछ की गई या नहीं? और सबसे महत्वपूर्ण, जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
बीमा कंपनी की जांच में क्या निकला?
सूत्रों के हवाले से बीमा क्लेम को लेकर जांच किए जाने की बात कही जा रही है।दावा किया जा रहा है कि कोटक महिंदा बैंक की सर्वे टीम भी सच का पता लगा चुकी है ।हालांकि, बीमा कंपनी की ओर से कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि या क्लेम पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों का सत्यापन ही सच्चाई सामने लाने का रास्ता है।
अब सवाल सीधे पुलिस और जांच व्यवस्था से!
आगजनी की घटना के बाद बीमा क्लेम को लेकर इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो जांच में देरी के आरोपों का जवाब कौन देगा? शिकायतकर्ता के साक्ष्यों की पड़ताल कब होगी? नुकसान के आकलन और दुकान के नाम में बदलाव से जुड़े दस्तावेजों की जांच कब होगी?
बिलासपुर पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और जांच किस स्तर पर है। यदि साक्ष्यों से किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ करोड़ों के कथित बीमा क्लेम का नहीं है, सवाल यह भी है कि शिकायत मिलने के बाद सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी निभाई गई या नहीं। फिलहाल, डाली ड्रेसेज के संचालक पर लगाए गए आरोपों पर जांच के बाद क्या सच सामने आता है इसका इंतजार बुधवारी बाजार के व्यापारियों सहित शिकायतकर्ता बेसब्री से कर रहे है। वही शिकायकर्ता को अभी भी पूरा यकीन है कि नव नियुक्त तोरवा थाना प्रभारी अब इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पूरे फर्जी क्लेम के खेल को जल्द ही उजागर कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेंगे और बैंक अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के बाद क्लेम का असल सच सामने आ पाएगा ।

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