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राखी से पहले खाद्य विभाग की बडी कार्रवाई, 17 जिलों मे छापेमारी से मिलावटखोरो में मचा हडकंप.. कड़वा सच ,बड़ा सवाल ?—रिपोर्ट आने तक बिक चुका होगा पूरा माल? कौन है जिम्मेदार ?



रायपुर। रक्षाबंधन के त्योहार से पहले मिलावटी और घटिया खाद्य सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग ने प्रदेशभर मे व्यापक जांच अभियान शुरू किया है। विशेष अभियान के तहत 17 जिलों मे एक साथ छापेमारी कर पनीर, खोवा, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांची गई। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों से संदिग्ध सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
खाद्य विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य त्योहार के दौरान बाजार मे बढने वाली खाद्य पदार्थों की मांग के बीच मिलावट पर अंकुश लगाना है। विभाग ने दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि बिना मानक और बिना वैध दस्तावेज के खाद्य सामग्री की बिक्री न की जाए। रक्षाबंधन से पहले छत्तीसगढ़ में खाद्य विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। प्रदेश के 17 जिलों में एक साथ छापेमारी कर मिठाई, खोवा, दूध और अन्य खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए जा रहे हैं। कार्रवाई से जहां मिलावट का कारोबार करने वालों में हड़कंप मचा है, वहीं इस पूरी कार्रवाई के बीच एक बेहद अहम सवाल भी खड़ा हो गया है—सैंपल तो आज लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट आखिर कब आएगी? त्योहारों के दौरान मिठाई और खाद्य सामग्री की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानों से बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं। लेकिन आम तौर पर जांच की प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने में समय लग जाता है। यहीं से व्यवस्था पर सवाल उठता है। जिस मिठाई, खोवा या दूध का सैंपल आज लिया गया, वह रिपोर्ट आने तक दुकान में मौजूद रहेगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं। ग्राहक तब तक वही सामग्री खरीदकर इस्तेमाल भी कर चुका होगा।

बिलासपुर मे 102 किलो संदिग्ध पनीर जब्त

बिलासपुर मे जांच के दौरान करीब 102 किलो ऐसा पनीर पकडा गया, जिस पर ब्रांड और गुणवत्ता को लेकर संदेह सामने आया। विभाग की टीम ने पनीर को जब्त कर उसके नमूने जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामग्री मानकों पर खरी उतरती है या नही।
अधिकारियों ने दुकानदारों से खाद्य सामग्री की खरीद और बिक्री से जुडे दस्तावेज भी मांगे। विभाग का कहना है कि मिलावट या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

महासमुंद मे 300 किलो पनीर पर कार्रवाई

महासमुंद जिले मे भी खाद्य विभाग की टीम ने करीब 300 किलो पनीर पकडा। जांच के दौरान इसकी गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद नमूने लिए गए और सामग्री को जांच प्रक्रिया मे शामिल किया गया।
विभाग ने यह कार्रवाई उस समय की है, जब रक्षाबंधन को देखते हुए बाजार मे दूध से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ रही है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान मिलावट की आशंका को देखते हुए निगरानी और कडी की गई है।

पनीर और खोवा की गुणवत्ता पर खास नजर

अभियान के दौरान पनीर, खोवा और दूध से तैयार होने वाली मिठाइयों को विशेष जांच के दायरे मे रखा गया है। खाद्य विभाग की टीम दुकानों, डेयरी और खाद्य निर्माण इकाइयों मे पहुंचकर उत्पादों के नमूने ले रही है।
अधिकारियों के अनुसार त्योहार के दौरान कम गुणवत्ता वाले दूध उत्पाद बाजार मे खपाने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से पनीर और खोवा की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

खरीदारी से पहले लेबल और बिल जरूर जांचे

खाद्य विभाग ने आम लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि पैक्ड खाद्य सामग्री खरीदते समय ग्राहक लेबल, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और अन्य जरूरी जानकारी जरूर देखें। दुकानदार से बिल लेना भी जरूरी है, ताकि किसी शिकायत की स्थिति मे उत्पाद के स्रोत का पता लगाया जा सके।विभाग ने कारोबारियों को भी निर्देश दिए हैं कि खाद्य सामग्री की खरीद और बिक्री से संबंधित बिल सुरक्षित रखें। बिना लेबल वाले या संदिग्ध उत्पादों की बिक्री पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।

त्योहार तक जारी रहेगा अभियान

खाद्य विभाग के अनुसार विशेष अभियान 23 अगस्त तक चलाया जाएगा। इस दौरान अलग अलग जिलों मे टीमों द्वारा लगातार जांच की जाएगी। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला भेजे जाएंगे और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
रक्षाबंधन के दौरान लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने निगरानी बढा दी है। 17 जिलों मे हुई कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों मे भी मिठाई, पनीर, खोवा और अन्य दूध उत्पादों की जांच जारी रहने की संभावना है।

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