
डेस्क खबर बिलासपुर। न्यायधानी में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तोरवा थाना क्षेत्र में एक ही दिन चाकूबाजी की दो वारदातों ने पुलिसिंग की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ देवरीखुर्द शराब दुकान के पास चाकू से हमला कर ऑटो चालक की हत्या कर दी गई, वहीं दूसरी ओर एक बुजुर्ग को धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। एक ही थाना क्षेत्र में में हुई दो दो चाकूबाजी की घटना से लोगो में दहशत है जिसके बाद सीधा सवाल उठा रहा है कि जब एक ही थाना क्षेत्र में अपराधी बेखौफ होकर चाकू चला रहे हैं, तो पुलिस आखिर कर क्या रही है?
शराब दुकान के पास हत्या—अपराधियों के हौसले बुलंद
देवरीखुर्द स्थित शराब दुकान के पास सोमवार को किसी बात को लेकर ऑटो चालक का अपने ही साथी से विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया और चाकू से हमला कर ऑटो चालक को मौत के घाट उतार दिया गया।
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस पहुंची, जांच शुरू हुई और अब आरोपी की तलाश की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि वारदात होने के बाद पुलिस की सक्रियता दिखाने से पहले अपराधियों को रोकने की व्यवस्था कहां थी?
दूसरी तरफ बुजुर्ग पर जानलेवा हमला
इसी थाना क्षेत्र में दूसरी वारदात में एक बुजुर्ग पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हालत किसी तरह अपनी जान बचा कर देवरीखुर्द इलाके में आया जिसके बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रहे स्थानीय पार्षद ने अपने साथी की मदद से उन्हें बाइक पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है किसी ने उनके गले में धारदार हथियार से हमला कर दिया और लगातार खून बहने और
गंभीर हालत को देखते हुए बुजुर्ग को बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल से अपोलो अस्पताल रेफर किए जाने की सूचना है।

मारपीट से लेकर लूट तक… फिर भी नहीं थम रहा अपराध
तोरवा क्षेत्र में अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मारपीट के वीडियो वायरल हो चुके हैं, लूट की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं और अब चाकूबाजी में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि दूसरे की जिंदगी खतरे में है। इसके बावजूद अगर अपराधी लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं तो यह पुलिस की गश्त, निगरानी और अपराध नियंत्रण व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

पुलिस सुस्त, अपराधी चुस्त!
तोरवा की तस्वीर देखकर यही सवाल उठ रहा है कि क्या बदमाशों के मन से पुलिस का डर खत्म हो चुका है?क्या संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नियमित गश्त होती है? क्या शराब दुकानों के आसपास पुलिस की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या पुराने अपराधियों और संदिग्ध तत्वों पर प्रभावी निगरानी की जा रही है? और सबसे बड़ा सवाल यह है एक के बाद एक वारदातों के बावजूद पुलिस कब जागेगी?
कानून-व्यवस्था सिर्फ घटना के बाद मौके पर पहुंचने और जांच शुरू करने का नाम नहीं है। पुलिस की असली जिम्मेदारी अपराध होने से पहले अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना है। जिसमें तोरवा पुलिस लगातार नाकाम साबित हो रही है।
तोरवा में लगातार हो रही वारदातें बता रही हैं कि कहीं न कहीं यह व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। अब जरूरत सिर्फ आरोपी पकड़ने की नहीं, बल्कि पूरे इलाके में अपराधियों पर ऐसी सख्ती करने की है कि चाकू निकालने से पहले बदमाशों को पुलिस और कानून दोनों का डर याद आए। वरना सवाल उठता रहेगा तोरवा में कानून का राज है या अपराधियों का?

