डेस्क खबरबिलासपुर

संभाग के अन्य जिलों में कबाड़ियों पर सख्ती लेकिन बिलासपुर में कबाड़ राज बेखौफ!
कोरबा किंग पर बुलडोजर एक्शन, बिलासपुर में आखिर कब होगा आर्थिक प्रहार?” कथित अवैध नेटवर्क… नशे और चोरी की घटनाओं से बढ़ी चिंता !!



डेस्क खबर बिलासपुर../ बिलासपुर संभाग के कोरबा, रायगढ़, जांजगीर और मुंगेली जैसे जिलों में पुलिस और प्रशासन कबाड़ियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। कहीं गोदाम सील हो रहे हैं तो कहीं अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। लेकिन संभाग के सबसे बड़े जिले बिलासपुर में हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं, जहां नामचीन कबाड़ियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से कथित कबाड़ नेटवर्क लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।


ताजा मामला कोरबा जिले का है, जहां चर्चित लोहे के पुल चोरी कांड के आरोपी कबाड़ कारोबारी मुकेश साहू उर्फ “बरबट्टी” पर प्रशासन ने बड़ा आर्थिक प्रहार किया। उत्तरप्रदेश मॉडल पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने उसके बेजा कब्जे में बने आलीशान मकान और गोदाम पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम, तहसीलदार और सीएसपी सहित कई अधिकारी मौके पर डटे रहे। विरोध की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए थे। इससे पहले आरोपी के तीन गोदाम भी सील किए जा चुके हैं।


कोरबा की यह कार्रवाई अब पूरे संभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि बिलासपुर में भी लंबे समय से कबाड़ कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
न्यायधानी में बढ़ता कबाड़ नेटवर्क, बढ़ते अपराध
स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि बिलासपुर के कई थाना क्षेत्रों में चोरी और नशे से जुड़े अपराधों के पीछे कबाड़ियों का कथित नेटवर्क एक बड़ी वजह बन चुका है। सिरगिट्टी, सरकंडा, सकरी, सिविल लाइन और हिर्री जैसे इलाकों में खुलेआम कबाड़ कारोबार संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं।


बताया जा रहा है कि नशे की गिरफ्त में आए नाबालिग और युवक कबाड़ बिनने और चोरी का सामान पहुंचाने के काम में इस्तेमाल हो रहे हैं। कई इलाकों में बिना नंबर की पिकअप और ट्रकों से संदिग्ध सामान गोदामों तक पहुंचाए जाने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक बड़े गोदामों में लोहे की कटाई, गलाने और सामान ठिकाने लगाने के उपकरण तक मौजूद हैं।
“ठेले से करोड़ों तक” — संरक्षण के आरोप
सूत्रों का दावा है कि बीते कुछ वर्षों में सरकारी और रेलवे का करोड़ों रुपये का चोरी का सामान कथित तौर पर कबाड़ नेटवर्क के जरिए खपाया जा चुका है। जिन लोगों ने कभी ठेले में सामान बेचने से शुरुआत की थी, वे अब करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। आरोप यह भी हैं कि पुलिसिया , राजनीतिक संरक्षण और प्रभावशाली लोगों की मदद से यह नेटवर्क वर्षों में मजबूत हुआ।
हालांकि समय-समय पर पुलिस और रेलवे पुलिस ने कार्रवाई कर चोरी का माल बरामद भी किया है, लेकिन लगातार और व्यापक अभियान नहीं चलने से कारोबार पर स्थायी असर नहीं पड़ पाया।



सरकंडा , सिरगिट्टी ,सकरी बना “कबाड़ गलियारा” ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकंडा क्षेत्र में कबाड़ियों का जाल तेजी से फैल चुका है। चोरी, चाकूबाजी और नशे से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि कार्रवाई केवल चुनिंदा नामों तक सीमित रहती है, जबकि गली-गली संचालित कबाड़ दुकानों पर प्रभावी शिकंजा नहीं कस पा रहा है। सिरगिट्टी में नामचीन कबाड़ियों का कब्जा है और अन्य थानों का मॉल यह बड़े पैमाने में खपाया जा रहा है वही सकरी को पुलिस के लिए सरदर्द बन चुके नामचीन कबाड़ियों ने अपना ठिकाना बना के रखा हुआ है।पड़ताल में अधिकांश कबाड़ के गोदाम में सरकारी मॉल नजर आता है ।



कानून और हाईकोर्ट का हवाला
चर्चा यह भी है कि कई पुलिस अधिकारी कबाड़ कारोबार से जुड़े नए कानूनों और हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं का हवाला देकर बड़ी कार्रवाई से बचते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब संभाग के दूसरे जिलों में प्रशासन बुलडोजर और आर्थिक प्रहार जैसे कदम उठा सकता है, तो बिलासपुर में वैसी सख्ती आखिर क्यों नहीं दिख रही। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिलासपुर में भी कबाड़ कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलेगा? क्या चोरी के कबाड़ से खड़ी हुई कथित अवैध संपत्तियों पर आर्थिक प्रहार होगा? और क्या नशे, चोरी और कबाड़ के इस कथित नेटवर्क पर पुलिस प्रभावी शिकंजा कस पाएगी — या फिर न्यायधानी में कबाड़ राज यूं ही बेखौफ चलता रहेगा और कानून की आड़ में थाने और कबाड़ी यू ही मालामाल होते रहेंगे ??

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