डिजिटल इंडिया की ‘बाल्टी मॉडल’ हकीकत !, जनगणना कर्मियों के आत्मसम्मान पर चोट, बाल्टी में परोसा गया भोजन ! वीडियो हुआ वायरल ,सरकार के दावों की खुली पोल !

डेस्क खबर – एक ओर देश डिजिटल इंडिया और सुशासन के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों को खुली चुनौती देते हुए सुशासन के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ में 2027 की जनगणना के प्रथम चरण के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविर खैरागढ़ में प्रशासनिक अव्यवस्था और संवेदनहीनता का शर्मनाक उदाहरण बनकर सामने आया है।तहसील खैरागढ़ के केंद्रीय विद्यालय में 15 से 17 अप्रैल तक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण के दौरान व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। भीषण गर्मी में घंटों प्रशिक्षण लेने वाले कर्मियों को भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब खाना मिला तो वह भी सम्मानजनक तरीके से नहीं—बल्कि प्लास्टिक की बाल्टियों में परोसकर दिया गया।
यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार भी है। सवाल यह उठता है कि क्या यही वह “व्यवस्था” है, जिसके भरोसे देश की सबसे बड़ी जनगणना कराई जाएगी?और भी गंभीर बात यह है कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक प्रशिक्षु के भोजन और जलपान के लिए ₹200 प्रति व्यक्ति स्वीकृत हैं। इसके बावजूद न प्लेट, न बुनियादी व्यवस्था—आखिर यह राशि गई कहां? क्या यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला नहीं है? इस अमानवीय व्यवस्था का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन की जमकर फजीहत हो रही है। प्रशिक्षण में शामिल कर्मियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह व्यवहार न केवल अपमानजनक है, बल्कि उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

अब सबसे बड़ा सवाल—
जिम्मेदार कौन?
₹200 प्रति व्यक्ति के बजट का हिसाब कौन देगा?
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी कागजों में दबा दिया जाएगा?
खैरागढ़ की यह ‘बाल्टी वाली तस्वीर’ सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी का आईना है। अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या वह इस पर सख्त कदम उठाएगा या फिर चुप्पी साध लेगा?
