डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट –42 : राशन घोटाला :  फिर कैमरे में कैद हुआ सरकारी राशन के बदले नगद पैसा देते दुकानदार.! फूड डिपार्टमेंट का ‘मोटा चूहा’: भ्रष्टाचार, आरोपी और सिस्टम पर सवाल। ??



डेस्क खबर बिलासपुर ../ बिलासपुर खाद्य विभाग में सरकारी राशन चावल की जमकर कालाबाजारी की जा रही है । गरीबों के हक पर डाका डाल सरकारी चावल के बदले नगद पैसा दुकानदार बेखौफ देते हुए कैमरे में कैद हो रहे वावजूद खाद्य विभाग कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहा है । ताजा वीडियो तिफरा इलाके में स्थित सरकारी उचित मूल्य दुकान आईडी ,402001124 का है जहां दुकानदार ग्राहकों को चावल के बदले नगद पैसा देते हुए कैमरे में कैद हुआ है । इतना ही नहीं इस दौरान मुफ्त और 10 रु किलो में दिए जाने वाले सरकारी चावल के दाम पर भी मोलभाव करता सुनाई दे रहा है , जिसके बाद चावल की कीमत तय होने के बाद दुकानदार पैसा देते हुए भी नजर आ रहा है ।




ऐसा भी नहीं कि खाद्य विभाग को जिले के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही चावल की हेराफेरी के बारे में जानकारी नहीं है कवर्धा में ‘मोटे चूहों’ और दीमक की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि न्यायधानी में भी सिस्टम को भीतर से कुतरते ‘मोटे चूहों’ की कहानी सामने आ गई। कलेक्टोरेट कैंपस के कोने में मौजूद मलाईदार फूड विभाग हमेशा चर्चाओं में रहते हैं।  हाल ही में मस्तूरी क्षेत्र में पदस्थ एक फूड इंस्पेक्टर का घूसखोरी का मामला उजागर हुआ। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसीबी ने कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को रंगेहाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। नोटों के साथ गिरफ्तारी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला तो शिकायत और ट्रैप के बाद सामने आ गया, लेकिन चर्चा इस बात की है कि सिस्टम के भीतर ऐसे कितने ‘मोटे चूहे’ सक्रिय हैं, जो बिना शोर-शराबे के भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।अपराध सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस तंत्र का भी है जो लंबे समय से ऐसे कृत्यों को पनपने देता है। आरोपी पकड़ा गया, लेकिन क्या सिस्टम में सुधार होगा—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

सरकारी चावल की कथित कालाबाजारी: कार्रवाई पर सवाल, जांच की मांग


बिलासपुर जिले में सरकारी पीडीएस चावल की कथित कालाबाजारी को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गरीबों के लिए निर्धारित चावल की अवैध खरीद-फरोख्त कर मुनाफाखोरी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस नेटवर्क को विभागीय और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रभावी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही।खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पुख्ता सबूत होने के बावजूद कार्रवाई में देरी की गई। साथ ही विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



पूर्व खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने और आईडी 401001096 से संबंधित शासकीय उचित मूल्य दुकान की जांच रिपोर्ट को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। प्रदेश स्तरीय चावल विक्रेता संगठनों ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।

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