डेस्क खबरबिलासपुर

पार्ट–32 :  राशन घोटाला : कार्रवाई के अभाव में बेखौफ चावल तस्कर, बिना नंबर की मोपेड से हो रही सरकारी राशन की कालाबाजारी !



डेस्क खबर बिलासपुर../  जिले में खाद्य विभाग की कथित अनदेखी और संरक्षण के चलते सरकारी राशन की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। गरीबों के लिए निर्धारित चावल खुलेआम बाजार में बेचे जा रहे हैं और चावल तस्कर पूरी तरह बेखौफ नजर आ रहे हैं। पहले जहां पिकअप और ऑटो के जरिए राशन की तस्करी की जा रही थी, वहीं अब तस्करों ने नया तरीका अपनाते हुए बिना नंबर प्लेट की मोपेड से चावल ढोना शुरू कर दिया है, ताकि आसानी से पहचान से बचा जा सके।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिलासपुर शहर के टिकरापारा, तोरवा, डिपुपारा, नेहरू नगर, मगरपारा सहित अन्य इलाकों में स्थित सरकारी राशन दुकानों से कम कीमत पर चावल खरीदा जा रहा है। इसके बाद यही चावल बड़े दुकानदारों और व्यापारियों को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क में राशन दुकान संचालकों और दलालों की मिलीभगत से सरकारी चावल की अफरातफरी और तस्करी की जा रही है पुख्ता जानकारी के बाद भी खाद्य विभाग के संरक्षण के कारण एक सिंडिकेट काम कर रहा है । गौरतलब है कि चावल विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय के खिलाफ पुख्ता जांच रिपोर्ट के बाद भी मामला दर्ज नहीं होने के कारण अब कुख्यात दलाल के हौसले बुलन्द है । इसके पहले भी चावल दलाल के खिलाफ थाने में शिकायत की जा चुकी है लेकिन कार्यवाही नहीं होने से यह बेलगाम होकर खुलेआम चावल तस्करी में लगे हुए है । गौरतलब है कि चावल दलाल अपने रुतबा दिखाने और सच को दबाने के लिए सोशल मीडिया में हथियारों के साथ प्रदर्शन कर धमकी भरा मेसेज भी वायरल कर चुके है जिसकी शिकायत भी की जा चुकी है लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी अब तक कानून के लंबे हाथ इनके गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए है ।



स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना नंबर की मोपेड में बोरी भर चावल ले जाते तस्कर अक्सर गली-मोहल्लों में देखे जा सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद खाद्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि चावल दलालों के खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में उनके हौसले और बुलंद हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह घोटाला और गहराता जाएगा, जिससे वास्तविक हितग्राही गरीब परिवार सरकारी राशन से वंचित रह जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या खाद्य विभाग इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या फिर यह कालाबाजारी यूं ही जारी रहेगी ??

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