छत्तीसगढ़

ठेले पर मरीज और खाट पर सिस्टम । वाह वाह छत्तीसगढ़…!
जागो सरकार , सो रहा है सिस्टम..!.
VIDEO ..किंस काम की स्वास्थ्य सुविधाये ?

डेस्क।छत्तीसगढ़ में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था होने की वजह से लगातार ग्रामीण अंचल के लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को मोहताज हो रहे हैं.। कई बार छत्तीसगढ़ के अंदुरनी इलाको से ऐसी मार्मिक तस्वीरे सामने आती है । जो सब कुछ खुद ही बयां करने के लिए काफी है कि छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य सिस्टम किंस कदर दम तोड़ चुका है ।ऐसी तस्वीरों से देश मे भर में प्रदेश की बदनामी होती है । खबर प्रसारित होने के बाद राजनैतिक बयान बाजी की झड़ी लगती है । लेकिन सिस्टम को कोई फर्क नही पड़ता और फिर कुछ दिनों बाद फिर एक नई खबर आ जाती है । अलग अलग।इलाकों से ऐसी तस्वीरें निकल कर सामने आती हैं जो काफी मार्मिक होती हैं और लोगों के मन में सवाल पैदा होता है कि आखिर छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी लचर क्यों है स्वास्थ्य विभाग को आईना दिखाते यह तस्वीरें अक्सर जेहन में एक सवाल खड़ा करती हैं कि इस सिस्टम के लिए जिम्मेदार कौन हैं? स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों के अभाव में कई ग्रामीण त्वरित इलाज नहीं मिल पाने की वजह से दम तोड़ देते हैं. कई बार ग्रामीण क्षेत्रो के अंदरूनी इलाकों से ऐसी तस्वीर निकल कर सामने आई है, जिसमें एंबुलेंस न होने की वजह से बीमार बुजुर्गों को को खाट में लिटाकर अस्पताल तक पहुचाने के लिए अपने बेबस और लाचार नजर आते है । भृष्ट सिस्टम के कारण लोग अपनी जिंदगी गंवा रहे है लेकिन सिस्टम जगाने के नाम नही ले रहा है और तस्वीरों से लगता है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं हाशिये पर है ।।
मरीजों के प्रति संवेदनहीनता गंभीर चुनौती बनती जा रही है. देश भर से में संवेदनहीनता की कुछ तस्‍वीरें आती रहती है छत्तीसगढ़ का हाल भी कुछ अलग नहीं है. दम तोड़ती स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के कारण लोग शवों को कंधे, ठेले और खाट पर ले जाने के लिए मजबूर हैं.
प्रदेश से दिल को झकझोर देने वाली 2 तस्वीर सामने आई है. सुशासन की सरकार में विकास के दावे के बीच सिस्टम की अनदेखी की इस शर्मनाक तस्वीर को देखकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. देखिए पूरी रिपोर्ट

ठेले पर सिस्टम
वहीं सिस्टम की नाकामी की एक और तस्वीर आपके सामने है । मामला बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड का है । दरअसल नगर पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत एक मजदूर मजदूरी का कार्य किया करता था जिसकी अचानक तबीयत बिगड़ने से उसके मासूम भांजे ने सामान ढोने वाले ठेले पर उसे हॉस्पिटल तक ले जाने के लिए सहारा लिया.. रास्ते में उस मासूम पर पुलिस की नजर पड़ी तो पुलिस के भी होश उड़ गए । वहीं खुद पुलिस चौकी प्रभारी वाड्रफनगर विनोद पासवान द्वारा उसे छू कर देखा गया तो उसका शरीर गर्म लगा तो उसे निजी वाहन से हॉस्पिटल तक पहुंचाया.. जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया । मृतक अशोक पासवान नगर पंचायत वाड्रफनगर के वार्ड क्रमांक 2 का निवासी है । वो मजदूरी का कार्य किया करता था । लोगों ने बताया कि वह अविवाहित है और बीते कई दिनों से उसकी तबीयत खराब थी जिसके बाद बीते शाम उसके मासूम भांजे ने उसे इलाज के लिए ठेले पर हॉस्पिटल तक ले जाने का जिम्मा उठा तो लिया लेकिन जिंदगी बचा नही सका ।

खाट पर सिस्टम
दंतेवाड़ा के कटेकल्याण स्वास्थ्य विभाग की बदहाली थम नहीं रही ।ब्लॉक मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत तुमकपाल की महिला मरीज फगनी मुचाकी की तबियत बिगड़ने पर स्थानीय लोगों ने 108 को काल किया ।लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण मजबूरी में मरीज को खाट पर लाना पड़ा । मुख्यालय से सटे गावों में स्वास्थ्य विभाग की ऐसी स्थिति है तो अंदुरुनी इलाकों का अंदाजा लगाया जा सकता है ।बहरहाल, सरकारी अस्पताल में सुविधा के मामले में पूरे प्रदेश की हालत कमोबेश एक सी है ।किसी तरह जिला अस्पताल पहुचने पर भीमरीज को रेफर ही किया जाता है ।दंतेवाड़ा से प्रायः मरीज डिमरापाल मेडिकल कॉलेज भेजे की सरकारी प्रथा है और डिमरापाल के विषय में पूरा संभाग परिचित है ।जितनी अव्यवस्था इस कॉलेज की है उसपर अनेक समाचार छपते हैं लेकिन सुधार बिल्कुल नहीं होता ।

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