डेस्क खबर

15 रुपए में कैसे भरेगा बच्चों का पेट ,कागजी पोषण और खाली थालियां: छत्तीसगढ़ के आदिवासी छात्रावासों में बदहाली की मार*


डेस्क खबर छत्तीसगढ़ ./ छत्तीसगढ़ शासन के आदिमजाति एवम अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में इन दिनों व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। एक तरफ सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर पोषण देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। विभाग द्वारा मेस संचालन के नाम पर जो बजट दिया जा रहा है, वह महंगाई के इस दौर में ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा प्रति छात्र भोजन (मेस) के लिए मात्र 15 रुपए प्रति थाली और नाश्ते के लिए 12.50 रुपए प्रति प्लेट की राशि तय की गई है। (एक दिन के खर्च के लिए प्रदाय कुल राशि रुपये 42.50 जिसमें 2 वक्त का भोजन और एक टाईम का नाश्ता शामिल है ) सबसे विडंबना यह है कि इस मामूली सी राशि में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बच्चों के दैनिक उपयोग की अन्य जरूरी चीजें जैसे साबुन, तेल, कोलगेट , ब्रस, लकड़ी, गैस अन्य आवश्यक सामग्री भी इसी में से उपलब्ध करानी होती है।
> गंभीर सवाल: आज के दौर में जब हर चीज़ के दाम आसमान छू रहे हैं, क्या 15 रुपए में किसी बढ़ते बच्चे को भरपेट और पोषणयुक्त भोजन दिया जा सकता है?


>
जानकारों और अभिभावकों का कहना है कि यह राशि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। इस नाकाफी बजट के कारण छात्रावासों में मेनू के अनुसार पौष्टिक आहार मिल पाना असंभव हो गया है। मजबूरन बच्चों को कम गुणवत्ता वाला या अधूरा भोजन खाकर ही काम चलाना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
क्या शासन इस महंगाई के दौर में बजट की समीक्षा कर राशि में बढ़ोतरी करेगा, या फिर आदिवासी और अनुसूचित जाति के ये बच्चे यूं ही कागजी दावों के बीच कुपोषण और लाचारी का शिकार बनते रहेंगे?

error: Content is protected !!