

डेस्क खबर बिलासपुर../ एक तरफ जहां जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह लगातार कानून व्यवस्था में कसावट लाने के अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देशित कर रहे है वही दूसरी तरफ सिरगिट्टी क्षेत्र की पुलिस कप्तान के निर्देश को दरकिनार करते हुए सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन के दौरान बिलासपुर में सामने आई चाकूबाजी और मारपीट की घटनाओं ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने विसर्जन से पहले हुड़दंगियों पर सख्ती की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद शहर के अलग-अलग इलाकों से मारपीट, विवाद और चाकूबाजी की खबरें सामने लगातार आती रही और पुलिस के सुरक्षा के दावों की पोल खुलती रही।
सबसे गंभीर मामला सिरगिट्टी के बन्नाक चौक क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक गणेश प्रतिमा विसर्जन के बाद लौट रहे माता चौरा और भवानी नगर क्षेत्र के युवकों के साथ बड़े बन्नाक के पास विवाद हुआ। इसी दौरान सिद्धांत ध्रुव और राहुल सिंह ठाकुर पर चाकू से हमला किए जाने की बात सामने आई। दोनों को इलाज के लिए सिम्स ले जाया गया। घटना की वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है, जबकि आरोपियों की पहचान और घटना की पूरी परिस्थितियां पुलिस जांच का विषय हैं।
इस मामले में पुलिस की सूचना व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा हुआ है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार थाना प्रभारी वायपी सिंह के अनुसार उन्हें घटना की सूचना नहीं मिली थी और एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई थी। अगर घायल अस्पताल पहुंच गए और पुलिस को वारदात की जानकारी तक नहीं हुई, तो विसर्जन के दौरान निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे है कि आखिर विसर्जन की के दौरान सिरगिट्टी पुलिस आखिर कहा थी ? और सिरगिट्टी पुलिस का सूचना तंत्र क्या कर रहा था ? मिली जानकारी के अनुसार चाकूबाजी के बदमाशों को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सूत्रों का दावा तो यहां तक है कि सिरगिट्टी क्षेत्र में लगातार हो रही चाकूबाजी और अपराधिक वारदातों के बाद भी विसर्जन के दौरान सिरगिट्टी थाने की पुलिस का एक भी जवान कानून व्यवस्था के लिए मौके पर मौजूद ही नहीं था।हालांकि सिरगिट्टी पुलिस के ऊपर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए थाना प्रभारी के मोबाइल में काल लगाया गया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया।


इधर सिटी कोतवाली चौक और ऊदल चौक पर भी विवाद की सूचना है। कोतवाली चौक पर पुलिस की मौजूदगी में दो पक्षों के भिड़ने के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठी का सहारा लेना पड़ा। पचरीघाट विसर्जन स्थल पर भी हंगामे और भगदड़ की स्थिति बनी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को थाने भेजा।

अब बड़ा सवाल यही है—जब पुलिस पहले से सख्ती का दावा कर रही थी, तो शहर में हुड़दंगियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए? विसर्जन शांतिपूर्ण कराने की जिम्मेदारी के बीच सामने आई इन घटनाओं ने पुलिस की रणनीति, निगरानी और सूचना तंत्र और दावों की पोल खोल कर रख दी है जिसके कारण न्यायधानी की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है ??

