
डेस्क खबर रायपुर../ अस्पतालों में मरीजों की सेवा और चिकित्सकीय जिम्मेदारियां संभालने वाले एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा अब सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। आंदोलन को अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी समर्थन दे दिया है। गौरतलब है दूसरे राज्यों में 25 हजार से 44 हजार तक स्टाइपेंड दिया जाता है जबकि छत्तीसगढ़ में महज 15,900 ही भुगतान किया जाता है । दूसरे राज्यो की तुलना में अभाविप बोली जिम्मेदारी बड़ी तो सम्मान भी बड़ा होना चाहिए ।

रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने पहले काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से शासन का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन मांगों पर ठोस पहल नहीं होने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया गया।
₹15,900 बनाम दूसरे राज्यों की तस्वीर
इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर सबसे बड़ा सवाल राशि को लेकर है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को ₹15,900 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलने की जानकारी सामने आई है।
इसके मुकाबले ओडिशा में करीब ₹44 हजार, पश्चिम बंगाल में करीब ₹43 हजार और झारखंड में करीब ₹25 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड दिए जाने का हवाला दिया जा रहा है।
यानी सवाल सीधा है—जब काम और जिम्मेदारी लगभग एक जैसी है, तो स्टाइपेंड में इतना बड़ा अंतर क्यों?
इंटर्न हैं, लेकिन जिम्मेदारी किसी से कम नहीं
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में प्रशिक्षण के साथ मरीजों की देखभाल और विभिन्न चिकित्सकीय कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अस्पतालों में उनकी ड्यूटी और जिम्मेदारियां स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
अभाविप का कहना है कि इंटर्न डॉक्टरों को केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला विद्यार्थी मानकर उनकी जिम्मेदारियों को कम करके नहीं आंका जा सकता। कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले इन डॉक्टरों को उनके कार्य और जिम्मेदारी के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
अभाविप का सरकार से सीधा सवाल
अभाविप प्रदेश मंत्री अनंत सोनी ने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों की मांग जायज है और संगठन उनके आंदोलन का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने सरकार से अन्य राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उचित स्टाइपेंड लागू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनरत डॉक्टरों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
हड़ताल का असर मरीजों पर न पड़े, सरकार करे पहल
इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लंबी खिंचती है तो इसका असर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में मामला केवल डॉक्टरों के स्टाइपेंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध अस्पतालों में मरीजों की सेवाओं से भी जुड़ सकता है।
अभाविप ने सरकार से मांग की है कि मामले को लंबा खींचने के बजाय तत्काल बातचीत शुरू की जाए और इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
एक तरफ इंटर्न डॉक्टर अपने स्टाइपेंड को लेकर आंदोलनरत हैं, दूसरी तरफ अभाविप के समर्थन से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार15,900 के स्टाइपेंड की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करेगी, या फिर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन और लंबा चलेगा? अब देखना होगा कि सरकार इन माँगो का क्या निराकरण करती है ताकि सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यस्था सुचारू रूप से चल सके और जरूरामंदो को बेहतर इलाज मिल सके ।
