

डेस्क खबर ./ रायपुर सूबे के मुख्यमंत्री के बदलते तेवर चर्चा का विषय बन गए हैं। कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि अफसरों को अपनी सोच और कार्यशैली में बदलाव करना होगा और जनता से बेहतर संवाद करना होगा। उन्हें यह भी निर्देश दिए कि छोटे-छोटे काम जिले स्तर पर ही निपटाए जाएं, ताकि लोगों को राजधानी नहीं आना पड़े।
मुख्यमंत्री की बातों से नौकरशाही में हलचल मची हुई है। अफसरों को अब यह समझ में आ गया है कि उन्हें काम सही तरीके से करना होगा। शिक्षा विभाग के कामकाज को लेकर भी मुख्यमंत्री नाराज दिखाई दिए। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी कमिश्नर के कामकाज पर मुख्यमंत्री तक कई शिकायतें पहुंची हैं। भाजपा के व्यापार प्रकोष्ठ ने भी जीएसटी की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कमिश्नर ने रेवेन्यू बढ़ाने में नाकामी दिखाई है और विभाग के घटते रेवेन्यू का असर सरकार के कामकाज पर पड़ रहा है।

दो महीने से जीएसटी रेवेन्यू बहुत कम हो गया है। कमिश्नर मीणा अब तक विभाग को ठीक से नहीं चला पाए हैं और व्यापारियों को जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है। तत्कालीन कमिश्नर निलंबित आईएएस रानू साहू के खास अफसरों की एकतरफा कार्यशैली की चर्चा भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम में शामिल अफसर आज भी वही काम कर रहे हैं, जिनकी वसूली की गतिविधियों पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार अब कड़े फैसले लेने के मूड में है और यह संभावना जताई जा रही है कि फिसड्डी कमिश्नर की जगह किसी बेहतरीन आईएएस को पोस्टिंग दी जा सकती है। मुख्यमंत्री प्रदेश सरकार के सर्वेसर्वा हैं और उनके फैसलों का प्रदेश की कार्यशैली पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।