थाने के अंदर आरक्षक ने की आत्महत्या की कोशिश ! मचा हड़कंप ।अलग अलग बयान से मामले की गुत्थी उलझी ।क्या है मामले का सच ! बना हुआ है रहस्य ?

बिलासपुर / बिलासपुर के सीपत थाने के अंदर एक आरक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की । जिस वक्त आरक्षक ने यह कोशिश की उस समय लगभग सभी पुलिसकर्मी थाने परिसर में ही मौजूद थे । अपने ही विभाग के आरक्षक द्वारा आत्महत्या की कोशिश करने की खबर लगते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया । आनन फानन में किसी तरह आरक्षक को समझा कर मामले को शांत करने का प्रयास किया गया । वही इस मामले में आरक्षक धर्मेंद्र कश्यप ने सीपत थाना प्रभारी कृष्ण चंद्र सिदार पर भद्दी भद्दी गालियां ओर प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाकर थाने में खुदकुशी करने का असफल प्रयास किया ।
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की रात्रि को गाड़ियों की चेकिंग की जा रही थीं इसी दौरान एक ट्रेलर को रोकने को लेकर थानेदार और आरक्षक धर्मेंद्र के बीच विवाद हुआ था । और थानेदार ने मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों के सामने आरक्षक से गाली गलौच की थी ।
जानकारी के अनुसार गुरुवार को पुलिस जवानों की थाने में हो रही गणना के समय भी आरक्षक ने थानेदार से कारण जानने के लिए पहुंचा था लेकिन गणना के दौरान थाना प्रभारी थाने में मौजूद नहीं थे । जिसके बाद आरक्षक ने थाने में मौजूद को अपने अपमान की बात कह कर और उसके इस कदम के लिए थानेदार को जिम्मेदार ठहराते हुए फांसी लगाने की बात भी कही थी ।अपने ही विभाग के सामने बार बार खुद को अपमानित होते देख आरक्षक ने यह कदम उठाने की कोशिश की थी ।


वहीं इस मामले में पुलिस अफसर आरक्षक पर ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने की बात कहते नजर आ रहे है । अफसरों का कहना है कि आरक्षक किसी पारिवारिक समस्या से परेशान था और आरक्षक ने सीपत थाने से किसी अन्य थाने में तबादले का आवेदन भी दिया था और हो सकता है की इन्हीं किसी कारण से उसने आत्महत्या की कोशिश की होगी .फिलहाल अफसरों ने मामले जांच के बाद पूरा सच सामने आने की बात भी कही है । साथ ही इस पूरे मामले में थाना प्रभारी द्वारा आरक्षक से माफीनामा मांगने की खबर का खण्डन अफसर ने किया है ।
जबकि आरक्षक धर्मेंद्र कश्यप का कहना है कि वह किसी पारिवारिक समस्या से परेशान नही है और ना ही उसने घटना से पहले दूसरे थाने में तबादले के लिए कोई आवेदन अपने अधिकारियों को नही दिया है । उसके साथ थाना प्रभारी ने गाली गलोच की इसलिए उसने यह कदम उठाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था ।
वही कुछ दिनों पहले ही सरकंडा थाने में पदस्थ एक प्रशिक्षु डीएसपी और तत्कालीन थाना प्रभारी के ऊपर प्रताड़ना का आरोप लगाकर एक आदिवासी आरक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी । जिसके बाद आदिवासी समाज ने आक्रोशित हो कर अफसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और मामले की गंभीरता को देख बिलासपुर एसपी ने थाना प्रभारी से थाने का चार्ज वापिस ले लिया था ।
अब इस मामले में आरोप आदिवासी थाना प्रभारी पर लगा है , साथ ही सीपत थाने के इस मामले में आरक्षक और पुलिस अफसरों के बयान भी अलग अलग आ रहे है इसलिए यह मामला अभी भी रहस्य बना हुआ है की आखिरकार थाने के भीतर आरक्षक ने आत्महत्या की कोशिश क्यों की .?
फिलहाल सूत्रो की माने तो थाना प्रभारी के ऊपर पहले भी अपने अधीनस्थ कर्मीचारियों के साथ अभद्र व्यवहार और बेवजह परेशान किया जाता रहा है जिसकी शिकायत पुलिस कर्मियों ने उच्च अधिकारियों से मौखिक रूप से की थी ।
अब देखना होगा कि आरक्षक और थानेदार के बीच हुई कहासुनी के बाद आई घटना का असली सच कब सामने आता है ? थानेदार और आरक्षक में किसकी बिदाई सीपत थाने से की जाती है .? और किसके ऊपर उच्च अधिकारियों द्वारा कार्यवाही की जाती है .?
या खाकी से जुड़े इस मामले को रफा दफा कर मामले को ठंडे बस्ते पर डाल दिया जाता है .?
फिलहाल इस मामले का सच यही है कि थाने के अंदर ही पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक आरक्षक ने खुदकुशी की कोशिश की थी । जिसकी पुष्टि पुलिस के उच्च अधिकारी थाना प्रभारी से लेकर पीड़ित आरक्षक ने खुद की है ।