छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा से शोक ।19 बैगा आदिवासियों की मौत की खबर ।माल ढोने वाले वाहन में सफर कर रहे थे मजदूर .! क्या है हादसे का सच ? पढ़िए ख़बर देखिए घटना का दुखद वीडियो !

डेस्क खबर ..छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक भीषण दर्दनाक हादसे की दुखद हादसे में 19 बैगा आदिवासियों की मौत हो गई है। वही आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए है । बताया जा रहा है कि पडरिया के कुकदुर के पा वाहपानी की घाटी के पास यह हादसा हुआ हाजी जब मजदूर लोग तेंदूपत्ता तोड़कर जब वापस लौट रहे थे तभी अचानक घाटी में गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया और ड्राइवर ने संतुलन खोया और मजदूरी से भरी गाड़ी कई फीट गहरे गड्ढे में गिर गईं और यह भीषण हादसा हो गया।
हादसा हादसा इतना गंभीर था कि 13 लोगों की मौके में ही मौत हो गई जबकि तीन लोग रास्ते में अपना दम तोड़ दिया वहीं तीन लोगों की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कलेक्टर जन्मेजय महोबे और एस पी अभिषेक पल्लव स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची
इस दुखद खबर के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और तमाम नेताओं ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। लेकिन इस घटना से सवाल भी खड़े हो गए हैं ,? कि पिकअप जो की मालवाहक है उस वाहन पर इन मजदूर आदिवासियों को ढोया जा रहा था ।

हादसों के बाद मजदूरों को मुआवजा देकर उनकी मौत की कीमत देने का काम सरकारें कर भी देती है । लेकिन माल परिवहन वाहनों में इंसान को सफर करने की तस्वीर हर शहर गांव कस्बों में लगभग रोजाना देखने को मिलती है ।
लेकिन वावजूद उनको रोकने और वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नही की जाती है । चुनाव प्रचार के दौरान राजनेताओं के लिए भीड़ जुटाने के लिए जिस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों से ग्रामीणों को भर भरा कर लाया जाता है उसकी सच्चाई किसी से छुपी नहीं है ।
जबकि ऐसी जनसभा में जिले प्रशासन के बढ़े अधिकारी से लेकर पुलिस प्रशासन का पूरा तंत्र सक्रिय रहता है.?

ऐसे में सवाल यही है कि क्या इस दुखद हादसे और राष्ट्रपति के दत्तत्क पुत्र कहलाने वाले आदवासियो की मौत के बाद क्या सोए सिस्टम और आंख बंद किए राजनेताओं की नींद खुलेगी ,? और इंसानों को मौत का सफर करवाने वाले वाहनों पर ब्रेक लगेगा .? या फिर इसी तरह के हादसे होते रहेंगे .?