छत्तीसगढ़

ससूर की जगह बहु अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अपात्र.. हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा श्वेता सिंह की अनुकम्पा नियुक्ति पात्र नहीं है,,, अब क्या दोषियों पर होगा एफआईआर दर्ज,पढ़िये पूरी खबर।

बिलासपुर – ससुर की मौत के बाद पुत्र वधु को दी गई अनुकम्पा नियुक्ति के मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शासन की अपील मंजूर कर सिंगल बेंच का आदेश अपास्त कर दिया हैं, याचिकाकर्ता स्वेता सिंह के ससूर मनमोहन सिंह पवार सूरजपुर का भैयाथान में बीईओ के पद पर रहते हुए 16 दिसम्बर2018 को निधन हो गया, स्वेता को ससूर के स्थान पर लाखासार में 2 जून 2021 को सहायक ग्रेड 3 पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई इसके खिलाफ़ एक शिकायतकर्ता ने शासन से शिकायत की थी, डीइओ बिलासपुर ने 26 अक्टूबर 2021 को नोटिस दिया ,श्वेता ने जवाब में बताया की उनके पति शिक्षाकर्मी वर्ग एक व जेठ वर्ग 2 पद पर कार्यरत है, जो शासकिय सेवक नही है, डीईओ ने इस तर्क को अमान्य करते हुए श्वेता की अनुकम्पा नियुक्ति निरस्त कर दी। इसके खिलाफ पेश याचिका पर सिंगल बेंच ने डीईओ के आदेश को खारिज करते हुए आदेश दिया कि उसे सेवा से बहाल करते हुए समस्त लाभ दिया जाए, इसे लेकर साशन ने डी बी में अपील की चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने शासन की अपील सुनते हुए अनुकम्पा नियुक्ति निरस्त करने के निर्देश पर पहले स्थगन दिया था, अगस्त माह में अंतिम सुनवाई कर निर्णय सुरक्षित रखा गया था, कोर्ट ने अपना फैसला जारी करते हुए शासन की अपील मंजूर कर ली इसके साथ ही सिंगल बेच का आदेश अपास्त कर दिया डि बी के दिये गए फैसले के मुताबिक स्वेता सिंह अनुकम्पा नियुक्ति के पात्र नही है।

बता दें कि पूर्व डीईओ पी दाशरथी व लिपिक विकास तिवारी व चयन समिति के कई सदस्यों पर इस मामले में अबतक कोई ठोस कार्रवाई नही हो पाई हैं, जबकि केवल स्वेता सिंह ही नहीं इसके अतिरिक्त सात अन्य का सेवा समाप्त किया जा चुका है नियमतः सम्बंधित दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि कुछ वर्ष पूर्व मुंगेली जिले में भी इस प्रकार का फर्जीवाड़ा सामने में आया था जिसमे कानूनी व ठोस विभागीय कार्यवाही की गई थी अब देखने वाली बात यह होगी कि इस निर्णय के बाद विभाग/शासन स्तर से क्या कार्यवाही होती है।

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