डीजल चोरों को पकड़ा, तो आरक्षक पर ही गिरी गाज! सिरगिट्टी थाने में आधी रात का खेल! संदिग्ध रिहा, जवान लाइन अटैच; तोरवा का मामला,बताकर सिरगिट्टी पुलिस ने झाड़ा पल्ला!




डेस्क खबर बिलासपुर ../ बिलासपुर के सिरगिट्टी थाने में पदस्थ आरक्षक को डीजल चोरी के संदिग्धों को पकड़ना महंगा पड़ गया और तो और आरक्षक को ही लाइन अटैच कर दिया गया! जिस जवान ने रात के अंधेरे में डीजल चोरी के कथित खेल पर शिकंजा कसने की कोशिश की, उसी की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। संदिग्धों को डीजल और सामान के साथ थाने लाया गया, लेकिन आरोप है कि बिना कार्रवाई उन्हें छोड़ दिया गया। दूसरी तरफ, आरक्षक को लाइन अटैच किए जाने से पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार-गुरुवार की दरमियानी सुबह करीब चार बजे तोरवा और सिरगिट्टी थाना क्षेत्र की सीमा के पास आरक्षक ने डीजल चोरी के संदेह में कुछ लोगों को पकड़ा। आरोप है कि संदिग्धों ने आरक्षक से गाली-गलौज की और उसकी वर्दी का कॉलर तक पकड़ लिया। आरक्षक ने तत्काल सिरगिट्टी थाना प्रभारी को फोन कर मदद मांगी और पूरी घटना से सिरगिट्टी थाना प्रभारी घनश्याम ठाकुर को अपने साथ की जा रही गाली गलौज और अभद्रता से अवगत करवाया उच्च अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस बल पहुंचा और सुबह करीब पांच बजे संदिग्धों को जब्त डीजल व अन्य सामान के साथ थाने लाया गया।
लेकिन थाने पहुंचते ही कार्रवाई का पहिया क्यों थम गया?
सिरगिट्टी थाना प्रभारी का तर्क है कि घटना उनके क्षेत्र की नहीं, बल्कि तोरवा थाना क्षेत्र की थी। इसलिए संदिग्धों को छोड़ दिया गया। सवाल यह है कि अगर मामला तोरवा का था, तो संदिग्धों को तोरवा पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया गया? जब डीजल और संदिग्ध सामान जब्त किया गया था, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? सूत्रों की माने तो अजय दुबे नाम का संदेही काफी लम्बे समय से डीजल चोरी का अवैध कारोबार तोरवा और सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के बार्डर पर संचालित करता है और इसके खिलाफ पहले भी पुलिस कार्यवाही करने की बात भी सामने आ रही है। विभागीय सूत्रों की माने तो आरक्षक ने इस पूरे अवैध कारोबार की जानकारी सिरगिट्टी थाने के संज्ञान में होने का दावा भी थाना प्रभारी से मोबाइल में बातचीत के दौरान जिक्र भी किया था उसके बाद भी संदिग्ध डीजल चोरों को बिना जांच और कार्यवाही के थाने से छोड़ने से सवाल खड़े हो रहे है।
विभागीय सूत्रों की माने तो डीजल चोर से पुलिस से कथित मासिक लेन-देन और संरक्षण के दावे की बात कही जा रही है हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना होगा कि पूरे मामले और आरोपों को जिले के उच्च अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते है और जब्ती रिकॉर्ड, थाने की जनरल डायरी, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित मोबाइल कॉल की जांच कराई जाती है और कब पता चल पाता है कि संदिग्धों को छोड़ने का फैसला किस आधार पर हुआ और आरक्षक को लाइन अटैच करने के पीछे वास्तविक वजह क्या है?
डीजल चोरी के आरोपों से लेकर आरक्षक पर हुई कार्रवाई तक, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आखिर ड्यूटी निभाने वाले जवान की कार्रवाई गलत थी या इस पूरे घटनाक्रम में कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब पुलिस महकमे को देने होंगे?
