80 फीट की सड़क पर कब्जे का साम्राज्य! हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल? बड़ा सवाल ! कानून कमजोर है या कब्जाधारियों के रसूख के आगे पूरा सिस्टम बेबस?




डेस्क खबर बिलासपुर ../ बिलासपुर में निराला नगर पुराना बस स्टैंड मार्ग की 80 फीट चौड़ी सड़क पर कथित अवैध कॉम्प्लेक्स निर्माण का मामला लगातार तुल पकड़ता जा रहा है।सरकारी रास्ते रसूख के दम पर अतिक्रमण करने की शिकायत के बाद भी जिम्मेदार कुम्भकर्णीय नींद में सोए नजर आ रहे है। जिसके कारण नगर निगम की कार्यप्रणाली, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और न्यायालय के आदेशों के पालन पर सीधे सवाल खड़े हो रहे है।
हैरानी देखिए! सड़क की नापजोख में अतिक्रमण की पुष्टि होने का दावा है। शिकायतें हुईं, दस्तावेज सौंपे गए और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद भी यदि कब्जा नहीं हटता, तो आखिर कार्रवाई की फाइल किसकी मेज पर दम तोड़ रही है? इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी निगम के मदमस्त जिम्मेदार कार्यवाही को ठंडे बस्ते में डाल कर ac चेंबर में आराम फरमा रहे है। शिकायत के मुताबिक, पाण्डेय बंधुओं द्वारा 80 फीट मुख्य मार्ग पर कॉम्प्लेक्स निर्माण को लेकर विवाद है। आरोप है कि निर्माण के लिए न तो आवश्यक रजिस्ट्री उपलब्ध है और न ही स्वीकृत नक्शे को लेकर स्थिति स्पष्ट है। दावा यह भी है कि सड़क की जमीन पर निर्माण के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
आवेदक श्याम कश्यप ने कलेक्टर को शिकायत देकर अधिकारियों पर कब्जाधारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। वहीं, खबर में उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब सवाल यह है कि आदेश के बाद जमीन पर क्या कार्रवाई हुई?
नगर निगम की भूमिका पर भी उठे सवाल!
15 दिसंबर 2025 को नगर निगम द्वारा कब्जाधारियों का राजीनामा आवेदन निरस्त किए जाने का उल्लेख है। इसके बावजूद कथित अतिक्रमण नहीं हटने का आरोप है। दूसरी ओर, नापजोख में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है।
सबसे गंभीर सवाल भवन अधिकारियों की भूमिका को लेकर है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जिन अधिकारियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जिम्मेदारी है, उन्हीं की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
अब बुलडोजर चलेगा या फिर चलेगा तारीखों का खेल?
बिलासपुर की सड़कों पर आम आदमी से अतिक्रमण हटाने के लिए सख्ती दिखाई जाती है, तो फिर 80 फीट चौड़े मुख्य मार्ग पर कथित अवैध निर्माण के मामले में कार्रवाई का इंतजार क्यों?
क्या नगर निगम अतिक्रमण हटाकर सड़क को उसके वास्तविक स्वरूप में बहाल करेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन जमीन पर दिखाई देगा या मामला कागजों में ही उलझा रहेगा?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। सड़क की जमीन पर कथित कब्जे का सच सामने आना चाहिए, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ 80 फीट सड़क का नहीं, बल्कि कानून की साख और आम जनता के अधिकारों के साथ साथ उच्च न्यायालय के आदेश का भी है।
