पोड़ी-उपरोडा—पसान बस स्टैंड की जमीन पर हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद निर्माण का आरोप, क्या होगी कोर्ट की अवमानना पर कार्रवाई?*
*खसरा नंबर 174 का मामला: अनिल सोमानी और प्रदीप सोमानी पर आदेश के बावजूद निर्माण कराने का आरोप; न्यायालय के आदेश के उल्लंघन की जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग उठी___*




डेस्क खबर पसान/पौड़ी उपरोड़ा। कोरबा जिले के पौड़ी उपरोड़ा अनुभाग अंतर्गत पसान तहसील के बस स्टैंड स्थित खसरा नंबर 174 की भूमि को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आरोप है कि माननीय हाईकोर्ट द्वारा संबंधित भूमि के संबंध में स्थगन आदेश (स्टे) जारी किए जाने के बावजूद अनिल सोमानी और प्रदीप सोमानी द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यदि न्यायालय के आदेश के प्रभावी रहने के दौरान उसके विपरीत निर्माण किया जा रहा है, तो यह मामला गंभीर कानूनी जांच का विषय बन सकता है।

*हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी हुई तो तय हो सकती है कानूनी जवाबदेही__*
न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश का पालन करना संबंधित पक्षों के लिए आवश्यक है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खसरा नंबर 174 की भूमि पर कराया जा रहा निर्माण हाईकोर्ट के आदेश की शर्तों का उल्लंघन करता है? यदि आदेश में निर्माण पर रोक लगाई गई है और जांच में जानबूझकर उसके उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना से संबंधित कार्यवाही का प्रश्न उठ सकता है। हालांकि, इसका निर्धारण आदेश की वास्तविक भाषा, तथ्यों और सक्षम न्यायालय के निर्णय के आधार पर होगा।

*क्या दर्ज हो सकता है आपराधिक प्रकरण? प्रशासन करे तत्काल जांच__*
मामले में निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति, राजस्व अभिलेखों और हाईकोर्ट के आदेश का मिलान कर तत्काल जांच कराए जाने की आवश्यकता है। यदि प्रथम दृष्टया किसी संज्ञेय अपराध के घटित होने के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानून के अनुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, न्यायालय के आदेश की अवज्ञा के संबंध में उचित कार्यवाही के लिए सक्षम न्यायालय का रुख भी किया जा सकता है। केवल स्टे आदेश के कथित उल्लंघन से अपने आप आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं हो जाता; इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।

*पसान तहसील प्रशासन की भूमिका पर नजर*
बस स्टैंड पसान स्थित खसरा नंबर 174 की भूमि पर निर्माण को लेकर उठे सवालों के बीच अब पसान तहसील प्रशासन और पौड़ी उपरोड़ा अनुभाग के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रशासन को चाहिए कि मौके का निरीक्षण कराए, निर्माण कार्य की स्थिति दर्ज करे और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के आधार पर आवश्यक कदम उठाए। यदि आदेश का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
*अब सवाल—हाईकोर्ट के आदेश का पालन कौन सुनिश्चित कराएगा?__*
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की प्रति, निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है। अब देखना होगा कि प्रशासन मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और न्यायालय के आदेश के पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
