डेस्क खबररायपुर

रायपुर पहुंचे बाबा रामदेव ने देश के सामने खड़ी चुनौतियों पर रखी बेबाक राय…कहा बच्चों और युवाओं का भविष्य सबसे बड़ी चिंता


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रायपुर। योगगुरु बाबा रामदेव रविवार को राजधानी रायपुर पहुंचे। भोपाल से देहरादून की यात्रा के दौरान खराब मौसम के चलते उन्होंने रायपुर में रात रुकने का फैसला किया। वह सोमवार सुबह देहरादून के लिए रवाना होंगे।रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने देश की मौजूदा परिस्थितियों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं के भविष्य और राष्ट्रहित जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं को किसी एक व्यक्ति या एक संस्था के भरोसे छोड़ने के बजाय सामूहिक प्रयास से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

किस खतरे को सबसे गंभीर मानते हैं बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने कहा कि आज देश में किसी धर्म या जाति के खतरे में होने की बात करने के बजाय बच्चों और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत है। उनके मुताबिक भारतीय बचपन, देश की जवानी, वर्तमान और भविष्य ज्यादा गंभीर चिंता का विषय हैं।उन्होंने कहा कि बच्चों को राजनीतिक आंदोलनों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यदि आंदोलन किए जाएं तो उनका उद्देश्य संविधान, लोकतंत्र और देश की व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए।बाबा रामदेव ने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार की काफी गुंजाइश है। उन्होंने व्यक्ति केंद्रित व्यवस्था के बजाय ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई, जिसका लाभ व्यापक समाज को मिल सके।

वंदे मातरम के मुद्दे पर राजनीति से दूर रहने की अपील

राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो अभी नहीं देखा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम देश की एकता और अखंडता से जुड़ा विषय है।उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने के बजाय सभी पक्षों को राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके मुताबिक राष्ट्रहित और राष्ट्रधर्म को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

सिर्फ एक प्रधानमंत्री से हर समस्या हल होने की उम्मीद क्यों ठीक नहीं

देश की व्यवस्था को लेकर बाबा रामदेव ने कहा कि यह मान लेना उचित नहीं है कि केवल एक प्रधानमंत्री पूरे देश की सभी समस्याओं को ठीक कर सकता है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश में कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव हुए हैं। हालांकि उनका यह भी कहना था कि देश में सब कुछ बेहतर हो चुका है, ऐसा दावा करना भी सही नहीं होगा।बाबा रामदेव ने कहा कि किसी भी व्यवस्था का आकलन करते समय एकतरफा सोच के बजाय न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। जो अच्छा हुआ है उसे स्वीकार करना चाहिए और जहां कमियां हैं, वहां सुधार की कोशिश होनी चाहिए।

समस्या सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है

बाबा रामदेव ने देश की चुनौतियों को केवल नौकरी और रोजगार के मुद्दे तक सीमित मानने से भी इनकार किया। उन्होंने पर्यावरण समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी गंभीर चुनौती बताया।उन्होंने शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण पर चिंता जताई और कहा कि बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सरकारी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है।

व्यवस्था बदलने की शुरुआत कहां से हो सकती है

बाबा रामदेव ने कहा कि जो लोग सरकारी व्यवस्था का लाभ लेते हैं, उन्हें भी सरकारी संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने की सोच रखने वाले लोगों को अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के इलाज के लिए सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करना चाहिए।उनका कहना था कि जब समाज के प्रभावशाली और सक्षम वर्ग सरकारी संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने में अपनी भागीदारी बढ़ाएंगे, तब व्यवस्था में वास्तविक बदलाव की संभावना मजबूत होगी।बाबा रामदेव के मुताबिक देश की शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था में सुधार किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों को मिलकर जिम्मेदारी उठानी होगी और सामूहिक प्रयास के जरिए देश की व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा।

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