



डेस्क खबर बिलासपुर। अवैध नशे के कारोबार पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संभालने वाला आबकारी विभाग अब खुद गंभीर आरोपों के घेरे में है। एक महिला ने आबकारी उपनिरीक्षक ऐश्वर्या मिंज की टीम पर आधा पाव गांजा मिलने के बाद कथित तौर पर 50 हजार रुपये में सौदा करने का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि पैसे मिलने तक उसके बेटे को टीम अपने साथ घुमाती रही और रकम मिलने के बाद उसे छोड़ दिया गया। महिला के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो बिल्हा सर्किल के सिलपहरी और पौड़ी क्षेत्र के दौरान गई आबकारी टीम की कार्यवाही के समय का है और यह वीडियो दो दिन पहले का बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में आबकारी अधिकारी अपनी टीम के साथ नजर आ रही हैं, जबकि दूसरे वीडियो में एक महिला टीम पर गंभीर आरोप लगाती दिखाई दे रही है। उधर, एक युवक ने भी अधिकारी पर गाली-गलौज, मारपीट और जबरन गाड़ी में बैठाने का आरोप लगाया है।
महिला अधिकारी का पक्ष है कि टीम सूचना पर कार्रवाई करने गई थी, लेकिन कोई माल नहीं मिला। युवक के मामले में उनका कहना है कि वह शराब के नशे में अभद्रता कर रहा था, इसलिए उसे गाड़ी में बैठाया गया और माफी मांगने पर छोड़ दिया गया। वहीं, युवक का आरोप है कि उसने केवल कार्रवाई की जानकारी मांगी थी, जिसके बाद उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। युवक ने पुलिस और आबकारी आयुक्त से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब सवाल यह है कि यदि युवक ने अभद्रता की थी, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? अगर महिला के पास से गांजा मिला था, तो जब्ती और कानूनी कार्रवाई का दस्तावेज कहां है? और यदि कथित लेनदेन का आरोप लगाया गया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कौन करेगा?
क्या जिला सहायक आबकारी आयुक्त इन सवालों पर जवाब देंगे, या विभाग के भीतर उठे सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?
गौरतलब है कि मस्तूरी सर्किल में तैनाती के बाद महिला उपनिरीक्षक ऐश्वर्या मिंज को लेकर कथित अवैध चखना दुकानों के संचालन और संरक्षण संबंधी आरोपों पर मीडिया रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थीं। इन आरोपों की जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिले में कितनी चखना दुकानें वैध हैं और कितनी बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रही हैं, इसका स्पष्ट आंकड़ा भी सार्वजनिक होना चाहिए।
आखिर विभाग के पास दुकानों का रिकॉर्ड है, निरीक्षण की व्यवस्था है और कार्रवाई करने वाली टीम भी है, तो फिर वैध-अवैध दुकानों की स्थिति स्पष्ट करने में परेशानी क्यों? शिकायतों पर कार्रवाई हुई है, तो उसका विवरण सामने क्यों नहीं आता?
अब जवाबदेही से नहीं बच सकता विभाग!
दो वीडियो, अलग-अलग बयान और गंभीर आरोपों के बाद मामला केवल एक अधिकारी के बचाव या विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहिए। महिला के कथित लेनदेन के आरोप, युवक के साथ हुई घटना और चखना दुकानों से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जिला सहायक आबकारी आयुक्त को स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, संबंधित टीम से जवाब मांगा गया या नहीं और जांच के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
आखिर आबकारी विभाग में कार्रवाई का हिसाब कौन लेगा? शिकायतों की जांच कब होगी? और सहायक आबकारी आयुक्त कब सामने आकर इन सवालों का जवाब देंगे?
